श्रावस्ती। तराई में सोमवार रात से शुरू हुआ शीतलहर व कोहरे का प्रकोप लगातार जारी है। इसके चलते पांचवें दिन भी सूरज कोहरे की चादर में लिपटा रहा। वहीं रात से फुहार बन कर बरस रहे कोहरे के कारण पेड़ों के नीचे पानी टपक रहा है। तेज बर्फीली हवा के कारण मौसम का पारा लुढ़क कर आठ डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। आर्द्रता बढ़ने के कारण लोगों को कंपकंपाती ठंड का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद न तो अलाव जले और न ही गरीबों को कंबल ही वितरित किया गया।
जिले में मौसम का मिजाज पूरी तरह से ठंडा हो चुका है। शनिवार को भी जनपद वासियों को सूरज के दर्शन नहीं हुए। सोमवार देर शाम से शुरू हुआ घने कोहरे का दौर लगातार जारी है। वहीं कोहरा फुहार बन कर बरस रहा है। इससे मार्ग व पेड़ों के नीचे कीचड़ व फिसलन की समस्या उत्पन्न हो गई है। शाम से करीब 16 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही पश्चिमोत्तर बर्फीली हवा के कारण आर्द्रता बढ़ कर 60 प्रतिशत पहुंच गई।
वहीं तराई में शनिवार को अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम आठ डिग्री सेल्सियस रहा। शीत लहर के कारण लोगों को कंपकंपाती ठंड से जूझना पड़ रहा है। इसका असर सिर्फ इंसान ही नहीं मवेशियों पर भी दिखने लगा है। इस बारे में फसल अनुसंधान केंद्र बहराइच के मौसम विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. एमबी सिंह ने बताया कि तराई का तापमान अभी और गिर सकता है। लोग लापरवाही न बरतें, अन्यथा स्वास्थ्य के लिए लापरवाही घातक साबित हो सकती है।
न जले अलाव और नहीं बांटे कंबल
तराई में शुरू हुई शीतलहर के प्रकोप से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। इसके बावजूद भिनगा व इकौना नगर, अस्पताल, न्यायालय परिसर, तहसील व कलेक्ट्रेट सहित जिले के प्रमुख कस्बों व बाजारों तथा चौक चौराहों पर अब तक अलाव नहीं जलवाया गया। ऐसे में शनिवार को थाना समाधान दिवस होने के कारण अपनी फरियाद लेकर आए फरियादी ठंड से बेहाल दिखे। वहीं बाजार में लोगों को कागज व आसपास पड़े पालीथिन आदि को जला कर ठंड से बचने का प्रयास करते देखा गया।
उधर दिसंबर की कंपकंपाती ठंड गरीबों पर भारी पड़ने लगी है। इसके बावजूद जिला व तहसील प्रशासन की ओर से कंबल वितरण प्रक्रिया प्रारंभ नहीं कराई गई है। प्रशासन की हीलाहवाली के कारण गरीब, वृद्ध व बेसहारा लोग बिना गर्म कपड़े व कंबल के रात बिताने को विवश देखे जा रहे हैं। यह कंबल वितरण प्रक्रिया कब प्रारंभ होगी। इसकी सही जानकारी देने से अभी अधिकारी भी कतरा रहे हैं।
शीतलहर से लोगों को बचाने के लिए नगर निकाय व तहसीलों को अलाव जलाने का निर्देश व पैसा दिया जा चुका है। इसके बाद भी बावजूद यदि कहीं अलाव नहीं जला है तो जांच कराकर अलाव जलवाया जाएगा। जिससे किसी को कोई परेशानी न होने पाएं।- योगानंद पांडे, अपर जिलाधिकारी