बौद्ध तपोस्थली स्थित गंध कुटी में फूल पूजा करते श्रीलंका के अनुयायी।
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को श्रीलंका से आए अनुयायियों के 40 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से गंध कुटी में फूल पूजा की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया। बौद्ध सभा के दौरान भिक्षु ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पुष्पों का उच्च स्थान है। देवी-देवताओं और भगवान की आरती, व्रत, उपवास पर पुष्प चढ़ाए जाते हैं। धार्मिक अनुष्ठान, संस्कार, सामाजिक व पारिवारिक कार्यों को बिना पुष्प अधूरा समझा जाता है। पुष्पों की सुगंध से देवता प्रसन्न होते हैं। ये सुंदरता के प्रतीक हैं। पुष्प हमारे जीवन में उल्लास, उमंग और प्रसन्नता लाते हैं। पुष्प पापों को भगाने वाले और श्रेष्ठ फल प्रदान करने वाले होते हैं। भगवान को चढ़ाई जाने वाली पुष्पों की मालाओं में कमल की माला सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।