तुलसीपुर। जमुनहा तहसील क्षेत्र में अंश निर्धारण में बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिम्मेदारों की इस चूक से गरीब किसानों को प्रतिदिन तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सड़क किनारे स्थित बेशकीमती जमीनों को लेकर सबसे अधिक समस्या हो रही है। अंश निर्धारण में हुई गलती के कारण खातेदार और सहखातेदारों की जमीन बराबर-बराबर दर्ज हो गई है। इससे वास्तविक हिस्सेदारी को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। किसान अपनी जमीन की खरीद-बिक्री भी नहीं कर पा रहे हैं। राजस्व अभिलेखों में सही हिस्सेदारी दर्ज न होने से पारिवारिक रिश्तों में भी दरार पड़ रही है। यह लापरवाही ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। बैंक से लोन लेने और फार्मर आईडी बनवाने में भी किसानों को दिक्कत आ रही है। कई किसानों ने अपने अन्य खातों में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
बेशकीमती जमीन को बना दिया विवादित
ग्राम पंचायत चंदरखा बुजुर्ग के सच्चिदानंद ने एक मामला बताया। उनके बेटे अशर्फी लाल के नाम गाटा संख्या 152 में 0.543 हेक्टेयर भूमि दर्ज थी। यह जमीन जमुनहा-बहराइच मुख्य मार्ग पर होने से बहुत बेशकीमती है। पिता की मृत्यु के बाद जमीन भाइयों सच्चिदानंद, श्याम मनोहर, राजेंद्र और अरविन्द कुमार में बंटी। अंश निर्धारण के बाद प्रेमलता, नीलम और शिवरात्रि के नाम भी बराबर दर्ज हो गए, जिससे विवाद बढ़ा।
एक जमीन के 15 सह खातेदार
चंदरखा बुजुर्ग गांव के भागीरथ लाल ने गाटा संख्या 161 का उदाहरण दिया। इस 1.495 हेक्टेयर जमीन के 15 सहखातेदार हैं, जो जमुनहा-बहराइच मुख्य मार्ग पर चौराहे के पास है। पहले हिस्से अलग थे, पर अंश निर्धारण में सभी को बराबर अंश मिला। भागीरथ लाल ने आरोप लगाया कि इससे उनका वास्तविक हिस्सा कम हो गया है। वे जमीन बेच नहीं पा रहे हैं और बंटवारे को लेकर विवाद बना रहता है।
सच्चिदानंद। भागीरथ लाल।