भिनगा स्थित अग्निशमन केंद्र।- संवाद
श्रावस्ती। जमुनहा क्षेत्र में आए दिन अग्निकांड की घटनाएं हो रही हैं। फिर भी न तो अब तक अग्निशमन केंद की स्थापना की गई है और न ही पर्याप्त कर्मियों व संसाधनों की ही उपलब्धता है। ऐसे में जिला मुख्यालय से ही कर्मियों व वाहनों की व्यवस्था की जाती है।
देश के आकांक्षी विकास क्षेत्रों में शामिल जमुनहा विकास क्षेत्र को वर्ष 2013 में तहसील का दर्जा प्राप्त हो गया। फिर भी वहां पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव ही नजर आ रहा है। तहसील गठन के 12 वर्ष बाद भी अग्निशमन केंद्र की स्थापना नहीं हो सकी है। ऐसे में क्षेत्रवासियों की अग्निकांड से सुरक्षा के लिए एक वाहन व पांच कर्मियों की तैनाती कर दी जाती है। इनमें एक चालक, दो फायर कर्मी व दो होमगार्ड शामिल हैं।
एसडीएम आवास के निकट ही वाहन को खड़ा रखने के लिए अस्थाई तौर पर शेड बनाया गया है। इससे क्षेत्र में एक साथ यदि दो या उससे अधिक स्थानों पर घटनाएं होती हैं तो जिला मुख्यालय से मदद भेजी जाती है। कई बार तो आग बुझने के बाद ही जिला मुख्यालय से सहायता पहुंच पाती है।
गर्मी में बढ़ जाती हैं घटनाएं
धूप व गर्मी से चाहे फसल हो या फूस के घर छोटी सी चिंगारी से आग की चपेट में आ जाते हैं। जमुनहा क्षेत्र में बीते तीन दिनों में लगभग 70 बीघे फसल व घर जलकर राख हो चुके हैं। ऐसे में यदि अग्निशमन केंद्र की स्थापना हो जाती तो अग्निकांड की घटनाओं पर आसानी से काबू पाया जा सकता।
अग्निशमन केंद्र के लिए भूमि का चिह्नांकन तो हुआ है, लेकिन शासन से अब तक निर्माण कराने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। हालांकि आग पर काबू पाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर तरीके से प्रयोग किया जा रहा है।
- संजय कुमार जायसवाल, अग्निशमन अधिकारी