श्रावस्ती। गेहूं क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा टूटने का नाम नहीं ले रहा है। जबकि किसान 100-150 रुपये नुकसान उठाकर अपना गेहूं भिनगा गल्ला मंडी सहित आढ़तियों व बिचौलियों को बेच रहे हैं। इसका कारण क्रय केंद्रों में भुगतान में होने वाली देरी बताई जा रही है। जिले में समर्थन मूल्य योजना के तहत किसानों का गेहूं खरीदने के लिए 29 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। जहां एक अप्रैल से किसानों से 2125 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद होनी है। इसके लिए 1071 किसानों ने पंजीकरण भी कराया है। इसके बावजूद किसान अपनी उपज क्रय केंद्र न ले जाकर मंडी व आढ़तियों के हाथ बेच रहे हैं। अब तक क्रय केंद्रों पर बोहनी भी नहीं हुई है। गल्ला मंडी में किसानों का गेहूं 2050 रुपये प्रति क्विंटल तो आढ़तियों की ओर से 1950 से 2000 रुपये तक में खरीदा जा रहा है।
किसान राम जियावन का कहना है कि क्रय केंद्रों पर गेहूं उतरवाई व छनाई देना पड़ता है। इसके साथ ही पंखा लगा कर गेहूं की ओसाई कराई जाती है। कई बार तो ऐसा होता है कि जब किसान को कई दिन तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में गेहूं ले जाने का भाड़ा भी खर्च होता है। वहीं इसके विपरीत आढ़तियों और बिचौलियों को भेजकर खलिहान से ही उपज उठवा लेते हैं जिसका उन्हें भाड़ा भी नहीं देना पड़ता है। तौल के तुरंत बाद पूरे पैसे का भुगतान मिल जाता है। जबकि क्रय केंद्रों पर पैसा आएगा तब मिलेगा की बात कहकर कागज थमा दिया जाता है।