कलेक्ट्रेट स्थित तथागत सभागार में आयोजित मेले में लगा स्टाल व किसानों को संबोधित करते सीडीओ
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श्रावस्ती। कलेक्ट्रेट स्थित तथागत हाल में शुक्रवार को फसलोत्पादन की रणनीति के लिए नेशनल फूड सिक्योरिटी मिशन (तिलहन घटक) के तहत तिलहन मेले का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी ने की। इस दौरान मौजूद किसानों को विभिन्न जानकारी प्रदान की गई। साथ ही मेले में लगे स्टालों के माध्यम से भी किसानों को जानकारी प्रदान की गई।
तिलहन मेले में मुख्य विकास अधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने किसानों को जायद फसलों के बारे में विभिन्न जानकारियां प्रदान कीं। इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार ने कहा कि किसान आय में वृद्धि करने के लिए जायद फसलों में उर्द, मूंग, भिंडी, सूरजमुखी, करैला व लौकी आदि का उत्पादन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि समसामयिक फसलों में जैसे गेहूं में गेरूई रोग की रोकथाम के लिये डाईथेन एम 45 का छिड़काव लाभप्रद रहेगा। दलहनी फसल अरहर में फूल आने से पहले जैविक कीटनाशनक का प्रयोग करें। इससे फली छेदक बचाया जा सकता है। तिलहनी फसलों में माहू से बचाव हेतु नीम आयल जैविक कीटनाशक का प्रयोग करें।
उप कृषि निदेशक कमल कटियार ने किसानों को विभाग में संचालित योजनाओं के बारे में वृहद जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सूरजमुखी की खेती के लिए जिले के सभी विकासखंडों में 20 हेक्टेअर प्रदर्शन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गेहूं की फसल कटने के बाद धान की रोपाई में काफी लंबा अंतराल होता है। इस बीच किसान अपने खेतों में उर्द एवं मूंग की बोआई कर फसल तैयार होने पर फलियों को तोड़कर अवशेष खेतों में सड़ाकर जैविक खाद के रूप में खेत की उर्वरा शक्ति में वृद्धि कर सकते हैं।
भूमि संरक्षण अधिकारी शिरि वर्मा ने बताया कि किसान उर्वरकों पर निर्भरता कम करके जैविक खादों का प्रयोग करें। जिससे कृषि की लागत में कमी आएगी व उपज भी ज्यादा होगी। उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी ने कहा कि किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसी भी प्रकार की सहायता के लिए अपने संबंधित विकासखंड के राजकीय कृषि बीज गोदाम पर संपर्क कर सकते हैं। इस दौरान जिला कृषि अधिकारी आरपी राना, जिला कृषि रक्षा अधिकारी विजय कुमार, जिला उद्यान अधिकारी दिनेश चौधरी, सहायक निदेशक (मत्स्य) सुरेश कुमार सहित काफी संख्या में किसान मौजूद रहे।