घाटेपुरवा के पास कटान करती राप्ती नदी
तुलसीपुर। जलस्तर घटने के साथ ही राप्ती नदी ने जमुनहा तहसील क्षेत्र में कटान तेज कर दी है। नदी की लहरें खेतों को काटते हुए गांवों की ओर बढ़ रही हैं। सबसे अधिक खतरा ग्राम पंचायत कथरामाफी के मजरा घाटेपुरवा पर मंडरा रहा है। यहां अब तक करीब 25 बीघा कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। इससे ग्रामीणों में दहशत है। उन्होंने शासन-प्रशासन से कटान रोकने और गांव का अस्तित्व बचाने की मांग की है।
घाटेपुरवा निवासी बलदेव, ओमकार, कमल, भगई, रामसरन, रामकिशुन, गंगाराम, मोतीलाल, भल्लर, उजागर और गिरवर प्रसाद ने बताया कि नदी में उनकी करीब 25 बीघा जमीन कट चुकी है। इसमें धान की फसल लगे खेत भी शामिल हैं। कटान की आशंका के चलते किसान खेतों में खड़ी धान की फसल काटकर मवेशियों को खिला रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कटान इसी तरह जारी रही तो अगले साल तक गांव का अस्तित्व मिट सकता है। इससे लोग बेघर और भूमिहीन हो जाएंगे।
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कई पीढ़ियों से गांव में रह रहे परिवार चिंतित
घाटेपुरवा निवासी शांति देवी और गोकुल प्रसाद ने बताया कि राप्ती नदी तेजी से गांव की ओर बढ़ रही है। इससे ग्रामीण भयभीत हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कई पीढ़ियां इसी गांव में रह चुकी हैं, लेकिन कटान के चलते आने वाली पीढ़ियों का यहां रहना मुश्किल नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों से गांव को बचाने के लिए ठोस कटानरोधी उपाय करने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल बालू की बोरियां या ईंटें डालने से कटान नहीं रुकेगी। प्रशासन को स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
बाढ़ खंड की टीम को कटान वाले क्षेत्र में तैनात कर दिया गया है। जहां भी कटान हो रही है, वहां बचाव कार्य किया जाएगा। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावितों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
रवि प्रताप सिंह, एसडीएम