श्रावस्ती। राप्ती नदी के कटरा मथुरा घाट पर पुल निर्माण के लिए श्रावस्ती विधायक के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही जनता से सात वर्ष पूर्व किया गया वादा पूरा होने की उम्मीद जगी है।
जीवनदायिनी राप्ती नदी जिले को दो भागों में बांटती है। कई गांवों के लोगों के घर नदी के इस पार तो खेत उस पार पड़ते हैं। यही नहीं, तमाम गांव ऐसे भी हैं जिनका थाना नदी पार तो तहसील या ब्लॉक मुख्यालय नदी के दूसरी तरफ स्थित है। ऐसे में जिला गठन के पूर्व से ही नदी के विभिन्न घाटों पर पुल निर्माण की मांग होती रही है।
पुल न बनने की स्थिति में ग्रामीण स्वयं से ही बांस-बल्ली, लकड़ी व पुआल से अस्थायी पुल बनाकर नदी पार करते रहे हैं। इस समस्या को देखते हुए विगत विधानसभा चुनाव में श्रावस्ती विधायक रामफेरन पांडेय ने गिलौला में राप्ती के सिसवारा घाट, इकौना में राप्ती नदी के ककरा मझौवा व कटरा मथुरा घाट पर पुल का निर्माण कराने का वादा किया था।
सिसवारा घाट पर पुल निर्माण का काम लगभग पूरा हो चुका है। दो माह पूर्व ककरा मझौवा घाट पर पुल निर्माण का काम प्रारंभ हो चुका है। इस दौरान कटरा मथुरा घाट पर पुल न होने से क्षेत्रवासियों को होने वाली दुश्वारियों को अमर उजाला ने 10 जून के अंक में प्रमुखता से सचित्र उजागर किया था।
तब विधायक ने मुख्यमंत्री से इस संबंध में वार्ता होने व अगली बैठक में यह मुद्दा दोबारा उठाने का दावा किया था। शनिवार को विधायक के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री की सहमति के बाद क्षेत्रवासियों में इस वादे के भी पूरा होने की उम्मीद जग गई है।
मैंने कई बार कटरा मथुरा घाट पुल निर्माण के लिए मुख्यमंत्री से निवेदन किया है। मुख्यमंत्री ने पुल निर्माण की स्वीकृति प्रदान करने के साथ ही श्रावस्ती व बलरामपुर जिले के लोगों की समस्या को गंभीरता से लिया। इसके लिए जिलेवासियों की तरफ से मुख्यमंत्री को बधाई।
-रामफेरन पांडेय, विधायक, श्रावस्ती