बरसात न होने के कारण पंपिंग सेट से खेत की हो रहीे सिंचाई। -संवाद
श्रावस्ती/वीरपुर। तराई में किसान मौसम की मार झेल रहे हैं। पंपिंग सेट से फसल की सिंचाई करनी पड़ रही है। दूसरी ओर उर्वरक की किल्लत का भी सामना कर रहे हैं। महंगे दाम पर यूरिया खरीदकर खेत में डालनी पड़ रही है। इससे फसलों की लागत बढ़ती जा रही है।
जिले में बुधवार सुबह घने काले बादल तो छाये, लेकिन बिना बरसे ही चले गए। इसी तरह पूरे सावन माह बादलों की लुका छिपी चलती रही थी, अब भादो भी सूखा बीत रहा है। धान की फसल हो या मक्का, मेंथा या गन्ने की फसल, इन पर पानी की कमी साफ झलक रही है।
ऐसे में किसान फसलों को जिंदा रखने के लिए पंपिंग सेट से सिंचाई करने के लिए विवश हैं। बुधवार को वीरपुर क्षेत्र निवासी किसान इंद्रबहादुर ने बताया कि बड़ी मुश्किल से एक बोरी यूरिया समिति से मिली है, एक बोरी यूरिया प्राइवेट दुकान से लाकर धान की फसल में डाल रहा हूं।
किसान बाबादीन ने बताया कि बारिश न होने से फसल बर्बाद हो रही है। ऐसे में किसी तरह महंगे दाम पर डीजल लाकर पंपिंग सेट से सिंचाई करनी पड़ रही है।
वैकल्पिक व्यवस्था ही एकमात्र उपाय
इस बार जिले में मानसून बेहतर ढंग से प्रभावी नहीं हो सका है। कम बारिश होने से किसानों को दिक्कत हो रही है। इस समय किसानों के सामने नहर, पंपिंग सेट व ट्यूब वेल आदि से सिंचाई करना ही एकमात्र उपाय है। हालांकि जिले में अभी सूखे के हालात नहीं हैं।
-सुरेंद्र चंद्र चौधरी, उप कृषि निदेशक