श्रावस्ती। शिक्षा के बदलते तरीकों में गरीब बच्चे पीछे छूटते जा रहे हैं। ऐसे इन बच्चों की शिक्षा की उड़ान में सपनों की टच स्क्रीन मदद करेगा। इस अभियान के तहत बेसिक शिक्षा विभाग आम लोगों से उनके खराब एंड्रायड मोबाइल मांग रहा है। इसे ठीक कराकर उसे गरीब बच्चों को दिया जाएगा। इस मोबाइल में बेसिक शिक्षा विभाग क्लासवार बच्चों के लिए पाठ्य सामग्री अपलोड करके देगा। इसका अध्ययन बच्चे बिना नेटवर्क कनेक्शन के कर सकते हैं।
कोरोना काल में शिक्षा के तरीके बदल गए। स्कूल क्लास के बजाए डिजिटल क्लास, डिस्टेंस लर्निंग के तहत कई नए नए तरीके उपयोग किए जाने लगे। कई साफ्टवेयर भी उभर कर सामने आए, जिससे बच्चों की क्लासें चलाई जा रही है। यह सब तरीके परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले उन बच्चों के लिए बेकार है, जिनके घरों में एंड्रायड मोबाइल ही नहीं है। या फिर वह ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं, जहां नेटवर्क की उपलब्धता ही नहीं है।
देखा जाए तो इस टाइप के करीब 175 विद्यालय जिले में हैं, जो भारत नेपाल सीमा से सटे व जंगल से घिरे हैं। जहां मोबाइल पर पढ़ाई करना तो दूर वहां ठीक से लोग फोन पर बात भी नहीं कर पाते। यही नहीं इन पंजीकृत स्कूलों में करीब एक लाख सोलह हजार बच्चों में अस्सी फीसदी बच्चे ऐसे हैं जो बीपीएल परिवारों से आते हैं। उनके घरों में रोजमर्रा खर्चे के लिए भी काफी जद्दोजहद रहती है। वह एंड्रायड मोबाइल का खर्च वहन नहीं कर सकते।
ऐसे में लगभग अस्सी हजार बच्चे इस आधुनिक शिक्षा पद्धति से जिले में वंचित हैं। ऐसे बच्चों के लिए जिले के बेसिक शिक्षा विभाग ने एक नई पहल की है। इस पहल को बीएसए ने सपनों की टच स्क्रीन नाम दिया है। इस अभियान के तहत बेसिक शिक्षा विभाग जिले के चिह्नित मेधावी की सहायता के लिए आम लोगों के सहयोग से उनकी खराब टच स्क्रीन का मोबाइल मांग रहा है। इस टच स्क्रीन मोबाइल को विभाग पहले ठीक कराएगा।
इसके बाद उसमें क्लास वार डिजिटल सामग्री जिसमें पाठ्यक्रम के साथ साथ फीचर व आवाज भी होगी, उसे चिह्नित बच्चों को उपलब्ध कराएगा। इससे गरीब बच्चे भी शिक्षा की मुख्य धारा में जुड़ सकेंगे।
डीएम ने बढ़ाया अभियान का दायरा
डीएम टीके शिबू ने बेसिक शिक्षा के इस अभियान को गति देने व इसका दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। विभाग की ओर से चलाए जा रहे सपनों की टच स्क्रीन का दायरा बढ़ाते हुए उसमें लोगों से अपने खराब टीवी, एलईडी को भी डोनेट करने को कहा है।
इसके साथ ही बीएसए को निर्देश दिया है कि वह ऐसे स्कूलों का चयन करें, जहां नेटवर्क की व्यवस्था नहीं है। उन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सीएसआर फंड से एलईडी टीवी उपलब्ध कराई जाएगी। इस टीवी के साथ पेन ड्राइव में पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बच्चों को ऑफलाइन डिजिटल एजूकेशन दी जा सके।
बीएसए ओमकार राणा ने बताया कि सपनों की टच स्क्रीन अभियान में सहयोग के लिए कई लोगों से संपर्क किया गया है। आम लोग अपना सहयोग दे रहे हैं। कुछ मोबाइल जो ठीक हैं वह जिले में प्राप्त हुए हैं, जबकि कुछ लोग मोबाइल गैर जनपदों से कोरियर से भेज रहे हैं। उम्मीद है कि इस अभियान को गति मिलेगी।
इससे गरीब मेधावी छात्रों के जीवन में एक नया परिवर्तन लाया सकता है। इसलिए आम लोगों से अपील है कि वह अपने घरों में खराब पड़े मोबाइल व टीवी हम तक पहुंचाएं। हम उसे गरीब मेधावियों तक पहुंचाएंगे।