वीरपुर। तराई में रुक-रुककर हो रही झमाझम बारिश किसानों के लिए मुसीबत बनी हुई है। इकौना के वीरपुर क्षेत्र में नाले में कूड़ा डाले जाने से जलनिकासी बाधित है। इससे किसानों के खेतों में बारिश का पानी भरा है और गिरी धान की फसल सड़ने का खतरा बढ़ गया है। किसानों ने एसडीएम इकौना रवेंद्र कुमार से नाला साफ कराने की मांग की है।
इकौना तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत जोरडीह के परशुरामपुर बाजार से होकर गुजरने वाले नाले में आसपास के घरों के साथ कई गांवों का पानी आता है। यह नाला कुआना नदी से जुड़ा है। विदुहनी, पंडितपुरवा, झंझार, रामपुर, खरगूपुर, महदेइया, दसियापुर और बगही समेत कई गांवों का पानी इसी नाले से होकर निकलता है। पूर्व में बारिश का पानी नाले के रास्ते कुआना नदी में चला जाता था, जिससे खेतों में जलभराव नहीं होता था।
ग्रामीणों के अनुसार, परशुरामपुर बाजार में नाले पर बने पुल को लोगों ने कूड़ादान बना दिया है। पुल के पास कूड़ा जमा होने से नाला संकरा हो गया है और पानी का बहाव रुक गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई कर्मी भी पुल के पास ही कूड़ा डालते हैं। अर्नब तूफान के दौरान हुई बारिश और बुधवार को हुई बारिश का पानी खेतों में भरा हुआ है। इससे किसान परेशान हैं।
15 दिन से खेतों में भरा पानी
महदेईया निवासी किसान मंगलेश मिश्रा, कुलदीप, ननके और शोभाराम ने बताया कि खेतों में 15 दिन से पानी भरा है। पहले दो-तीन दिन में पानी निकल जाता था। किसानों ने कहा कि नाला साफ नहीं कराया गया तो धान की फसल सड़ सकती है। बालियों में अंकुरण होने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
टीम को मौके पर भेजकर प्रकरण की जांच करवाएंगे। किसानों को कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और नाले की साफ-सफाई करवाई जाएगी।
रवेंद्र कुमार, एसडीएम इकौना
-
बारिश-ओलों की मार, धान चौपट
श्रावस्ती। किसानों पर मौसमी मार थमने का नाम नहीं ले रही है। अर्नब तूफान की बारिश से किसान उबर भी नहीं पाए थे कि बुधवार को तेज हवा के साथ हुई बारिश ने फिर नुकसान पहुंचाया। सुबह से रात तक रुक-रुककर हुई बारिश से सबसे ज्यादा धान की फसल प्रभावित हुई। कई खेतों में मक्का और गन्ने की फसल भी गिर गई। तराई के कुछ इलाकों में ओले गिरने से धान की बालियों को नुकसान पहुंचा और खेतों में पानी भर गया। गिलौला के किसान पंकज शुक्ला, राजेश यादव व आदर्श मिश्रा ने बताया कि पहले की बारिश का पानी कम नहीं हुआ था, इसी बीच फिर बारिश हो गई। ओलों से धान के दाने काले पड़ने तथा बालियों के सड़ने और अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है। (संवाद)