इकौना में गुड़िया को झुलाती महिला सामाख्या।
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श्रावस्ती। श्रावण मास शुक्ल पक्ष पंचमी के दिन मनाया जाने वाला नागपंचमी का त्योहार जिले में सोमवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। लोगों के घरों में जहां नाग देवता को दूध व चना चढ़ाया गया। वहीं शाम को भिनगा के ठाकुरद्वारा मैदान सहित जिले के अन्य हिस्सों में गुड़िया मेले का आयोजन किया गया। जहां रंगबिरंगे परिधानों में पहुंची युवतियों व नन्ही बच्चियों के हाथों की बनी गुड़िया को बच्चों ने रंगबिरंगी छड़ी से पीटा।
श्रावण मास की पंचमी को मनाए जाने वाले नाग पंचमी का पर्व गुड़िया जिले में परंपरागत ढंग से मनाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने गोबर से अपने घरों के चारों ओर सीमांकन कर नाग देवता से परिवार के लोगों की रक्षा की कामना की। नागदेव को प्रसन्न करने के लिए महिलाओं ने घर के अंदर व बाहर दूध व चना चढ़ाकर उनका अनुनय विनय भी किया।
इस अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों की चौपालों सहित भिनगा नगर के ठाकुर द्वारा मैदान व इकौना के बेचूबाबा में गुड़िया मेले का आयोजन किया गया। जहां युवतियां रंगबिरंगे परिधान व जेवर से लैस होकर झूलों का आनंद लेती दिखीं।
वहीं नन्ही-मुन्नी बच्चियों ने हाथों से बनी गुड़िया बच्चों के सामने फेंककर भाइयों पर बुरे साए को दूर करने की कामना की। वहीं नन्हे-मुन्ने बच्चों ने रंगबिरंगी छड़ी से गुड़िया पीटकर बहनों के जीवन में आने वाली बाधाओं को अपने बाहुबल से दूर करने का विश्वास दिलाया।
गुड़िया पिटाई की नहीं, पालने की अधिकारी : महिला सामाख्या
गुड़िया पर्व पर भिनगा व इकौना में महिला सामाख्या ने झूला मेले का आयोजन किया। इसमें महिला सामाख्या की कार्यकत्रियों ने मेले में आए लोगों से अपील की कि गुड़िया बच्चियों का प्रतीक है। बच्चियां पीटने की नहीं बल्कि पालने में झुलाने की हकदार है। गुड़िया पीटने की प्राचीन परंपरा अब बंद कर गुड़िया के दिन बच्चियों द्वारा बनाई गई गुड़ियों को पालने में झुलाएं। इस दौरान महिला सामाख्या की ओर से नगर में रैली भी निकाली गई। इस मौके पर जिला समन्वयक सहित काफी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं, युवतियां व कार्यकर्त्रियां मौजूद रहीं।