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नाग पंचमी पर नहीं लगा गुड़िया मेला

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श्रावस्ती। वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण के खतरे को देखते हुए शनिवार व रविवार को लॉकडउान किया गया है। ऐसे में इसका असर नाग पंचमी के पर्व पर भी देखने को मिला। नाग पंचमी पर न तो बागों में कहीं झूले पड़े और न ही गुड़िया के मेले का ही आयोजन हुआ। बच्चों ने अपने घर के आंगन में गुड़िया पीटने की रस्म अदायगी की। जबकि महिला समाख्या की ओर से आयोजित होने वाला गुड़िया झूला मेला इकौना व भिनगा में नहीं हुआ।
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बात जब सावन की हो तो सावन की रिमझिम फुहारों, बागों में पड़े झूले व नागपंचमी पर नगर सहित गांव की चौपालों में लगने वाले गुड़िया मेले की याद ताजा हो जाती है। रंग बिरंगे परिधानों में सजी संवरी युवतियां व नव विवाहिताएं सावन के गीत गाते हुए बागों में पड़े झूलों का आनंद लेती थी। इसके बाद शाम को गांव की चौपालों में पहुंचती थी। जहां उनके द्वारा रंग बिरंगे कपड़े की बनाई गई गुड़िया डाली जाती थी। जिसे नन्हें मुन्ने बच्चे रंग बिरंगी छड़ी से गुड़िया पीटते थे।
ऐसी मान्यता थी कि सावन में बहने अपने भाईयों को बुरी बलाओं से बचाने के लिए गुड़िया स्वरूप बनाकर भाईयों के सामने फेंकती थी। जिसे डंडे से पीट कर भाई भी हर परिस्थिति में बहनों की रक्षा करने का भरोसा दिलाते थे। इसके लिए नव विवाहिताएं अपनी ससुराल से सावन में वापस अपने मायके आ जाती थी। झुंड में निकलने वाली युवतियां व नव विवाहिताएं सहेलियों से मिल कर अपने दुख सुख भी साझा करती थी। लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी नहीं है।
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वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते संक्रमण ने जहां लोगों को घरों में दुबकने के लिए मजबूर कर दिया। वहीं शनिवार को लॉकडाउन व पुलिस की सख्ती के कारण लोग न तो झूला झूलने के लिए घरों से बाहर निकले और न ही गुड़िया मेले का ही जिले में आयोजन हो सका। नागपंचमी पर भी शनिवार को गांव की चौपाल व बाग सूने नजर आए।
नाग पंचमी पर घर घर पूजे गए नाग देवता
जिले में शनिवार को नाग पंचमी पर भले ही कहीं सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित नहीं हुए, लेकिन परंपराओं का निर्वहन किया गया। घरों में परंपरागत ढंग से दूध व चने का छिड़काव किया गया। इसके साथ ही महिलाओं ने चने के बने पकवान व दूध से नागदेवता का पूजन किया। साथ ही अपने व घर परिवार सहित ईष्ट मित्रों की रक्षा करने व उन्हें सुख तथा समृद्धि प्रदान करने की प्रार्थना की गई। इसके साथ ही लोगों ने रिश्तेदारों के घर पहुंच कर निमंत्रण व आतिथ्य भी स्वीकार किया।
हालांकि प्रशासन की ओर से रिश्तेदारों को घर न बुलाने व किसी का आतिथ्य न स्वीकार करने की सलाह दी गई थी। इसके बावजूद लोग अपने रिश्तेदारों के आते जाते देखे गए। शनिवार को लॉकडाउन के कारण कोई भी सपेरा सर्प लेकर लोगों को दिखाने नहीं पहुंचा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में नागपंचमी का पर्व पर बच्चों ने गुड़िया पीट कर परंपरा का निर्वहन भी किया।
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