श्रावस्ती। गिलौला विकासखंड के बंतवारा गांव में चल रही सात दिवसीय भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को अयोध्या से आए कथा व्यास डॉ. महेश दास ने राजा परीक्षित को मिले श्राप की कथा सुनाई। उन्होंने लार्ड मैकाले की शिक्षा प्रणाली छोड़कर गुरुकुलीय शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने बताया कि वन में शिकार के दौरान भूख-प्यास लगने पर राजा परीक्षित ऋषि शमीक के आश्रम पहुंचे। ऋषि के मौन व्रत में होने से जवाब नहीं मिला तो राजा ने क्रोध में उनके गले में मृत सांप डाल दिया। इस पर ऋषि पुत्र शृंगी ने सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से मृत्यु का श्राप दिया। कथा व्यास ने कहा कि भोजन छोड़ना पड़े तो छोड़ दें, लेकिन बच्चों की शिक्षा से समझौता न करें। इस दौरान विनोद कुमार मिश्रा, कमला मिश्रा सहित ग्रामीण मौजूद रहे।