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Shravasti News: जिला बने हो गए 26 साल, सुविधाओं का अकाल

Sun, 21 May 2023 10:40 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
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श्रावस्ती। जिले की स्थापना को आज 26 साल पूरे हो रहे हैं। इन 26 वर्ष में भी जिलेवासियों को मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया नहीं हो सकी हैं। जिला स्थापना के बाद लोगों में बेहतरी की उम्मीद जगी थी। इसके लिए लोगों ने प्रदेश के तीनों प्रमुख दलों पर आस्था जताते हुए उनके उम्मीदवारों को सदन भी भेजा। इसके बावजूद आवागमन व उद्योग जैसी मूलभूत सुविधाओं का सपना अब तक सपना ही बना हुआ है। बुद्ध पूर्णिमा पर 22 मई 1997 को श्रावस्ती आई तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने बलरामपुर के साथ ही श्रावस्ती को भी जिले का दर्जा देते हुए उसका मुख्यालय भिनगा बनाया था। जिलेवासियों के लिए यह बिना मांगी दुआ से कम नहीं थी। हर किसी को जिला बनने के बाद श्रावस्ती में बेहतर मार्ग, आवागमन के संसाधन, उद्योग सहित कई अन्य योजनाओं का लाभ मिलने की उम्मीद जगी थी, जो 26 वर्ष बाद भी अधूरी है। इन 26 वर्ष में जिले के भौगोलिक स्थिति में भी बदलाव हुआ। लेकिन नहीं बदली तो जिले की मूलभूत समस्या। जो आज भी बरकरार है।
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भौगोलिक स्थिति में यह हुए बदलाव
बहराइच को काट कर बनाए गए श्रावस्ती जिले में पयागपुर, विशेश्वरगंज, जमुनहा, सिरसिया, हरिहरपुररानी, इकौना व गिलौला विकासखंड व थानों को शामिल किया गया था। एक मात्र भिनगा तहसील वाले इस जिले में तब इकौना व पयागपुर को तहसील का दर्जा दिया गया था। बाद में पयागपुर व विशेश्वरगंज ब्लाक को पुन: बहराइच में समायोजित कर दिया गया। इसके साथ ही पयागपुर तहसील भी जिले का हिस्सा नहीं रही। इसके बाद जमुनहा को तहसील का दर्जा दिया गया। वहीं इकौना में ग्राम न्यायालय की स्थापना कराई गई। इतना होने के बाद भी यह दोनों तहसीलें आज तक मुख्यालय भिनगा से सीधी बस सेवा से नहीं जुड़ सकी।

इन सुविधाओं की आज भी है दरकार
कृषि प्रधान इस जिले में 90 फीसदी आबादी खेती किसानी व मजदूरी पर निर्भर है। इसके बावजूद जिले में न तो एक भी चीनी मिल स्थापित हो सकी और न ही कोई उद्योग ही। भिनगा में पर्याप्त भूमि अधिग्रहण करने के बाद भी अब तक परिवहन निगम डिपो की स्थापना नहीं कराई जा सकी है। करीब आठ वर्ष पूर्व स्वीकृति मिलने के बाद भी अब तक जिले में रेल लाइन बिछाने का कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। जिला जेल की स्थापना की धीमी गति के कारण 26 वर्ष बाद भी जिले के बंदियों को बहराइच जेल से रिमांड पेशी पर भिनगा आना पड़ रहा है। भिनगा से इकौना, गिलौला व जमुनहा के लिए लगातार मांग के बाद भी अब तक सीधी बस सेवा का संचालन प्रारंभ नहीं हो सका।
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उच्च शिक्षा की भी नहीं हुई समुचित व्यवस्था
करीब 14 लाख की आबादी वाले इस जिले में बेहतर शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। आज भी उच्च व तकनीकी शिक्षा लेने के लिए लोगों को गैर जिलों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिले में स्थापित संयुक्त जिला चिकित्सालय में भी पर्याप्त चिकित्सकों व सुविधाओं के अभाव में लोगों को गैर जिलों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। सौ बेड का संयुक्त जिला चिकित्सालय आज भी प्रथम संदर्भन इकाई बना हुआ है।

खूब हुए दावे पर नहीं हुए काम
नेपाल सीमा से सटे इस जिले का इकौना, गिलौला व जमुनहा विकास क्षेत्र सहित इकौना जमुनहा तहसील राप्ती नदी पार पड़ते हैं। जबकि सिरसिया विकास क्षेत्र जंगल पार स्थित है। यहां अग्निकांड की घटनाओं को रोकने के लिए इकौना, सिरसिया व जमुनहा में अग्निशमन केंद्र की स्थापना कराई जानी थी। जिसके लिए भूमि का चयन भी किया गया। लेकिन आज अग्निशमन केंद्रों की स्थापना नहीं हुई है। अस्थाई रूप से इकौना में अग्निशमन वाहन खड़ा कराया गया है। ऐसे में अग्निकांड की घटनाओं में भिनगा का ही सहारा रहता है। जहां से वाहनों के पहुंचने में काफी समय लगता है।

इस क्षेत्र में और बेहतरी की थी उम्मीद
बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती भले ही विश्व मानचित्र पर अपनी छाप छोड़ रही हो, लेकिन यहां आने वाले विदेशी व देशी पर्यटकों को ट्रेन से बलरामपुर तो प्लेन से लखनऊ उतरना पड़ता है। तपोस्थली में हवाई अड्डे का निर्माण तो कराया जा रहा है। लेकिन भूमि चयन के बाद भी तपोस्थली में बस अड्डा स्थापित करने की योजना अधर में लटक गई है। केंद्र व प्रदेश सरकार के बौद्ध सर्किट बनाने के फैसले से जिलेवासियों में भी उम्मीद जगी थी। लेकिन यह उम्मीद आज भी अधूरी है।
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