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राप्ती के उफान से बढ़ीं मुश्किलें, पलायन शुरू

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इकौना के भगवानपुर में अपने बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाते ग्रामीण - फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। बाढ़ के दौरान दुश्वारियां बढ़ गई हैं। सरकारी मदद की आस छोड़ कर ग्रामीण कंधों पर अपने बच्चों को लेकर सुरक्षित स्थान की ओर निकल पड़े हें। वहीं प्रशासनिक मदद केवल सूखी सड़क तक ही सीमित है। एनडीआरएफ की संख्या कम होने के कारण वह हर जगह मदद का हाथ नहीं बढ़ा पा रहा है।
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राप्ती में आई बाढ़ का पानी लगातार बढ़ता जा रहा है। जिसके चलते अब इकौना व जमुनहा में ग्रामीणों के सामने दुश्वारियां चरम पर हैं। इकौना में 24 घंटे के अंदर कोई भी प्रशासनिक सहायता व बचाव दल न पहुंच पाने के कारण ज्यादा गहराई में घिरे ग्रामीण एक-दूसरे का साथ देकर दूसरी मंजिल पर फंसे हुए हैं। तो जिन लोगों के पास अभी निकलने का विकल्प है वह अपने बच्चों को कंधों पर लाद कर सुरक्षित स्थान की ओर शनिवार को निकलते हुए देखे गए। ऐसे ही कुछ कटरा भभरी भगवानपुर व आसपास के इलाकों में देखने को मिला।
यहां पानी शनिवार दोपहर एक बजे तक तीन से चार फीट तक ही था। पानी लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में ग्रामीण अपने खाने पीने का कुछ सामान व अपने बच्चों को गोद में लेकर सुरक्षित स्थान की ओर निकल पड़े हैं। इन्हें सुरक्षित ठिकाना कहां मिलेगा। यह भी नहीं जानते। जबकि जमुनहा इलाके में तैनात एनडीआरएफ की टीम तीन दिन से छत में फंसे ग्रामीणों को बचा कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रही है। यही नहीं कुछ स्थानों पर समूह में फंसे लोग एनडीआरएफ का इंतजार करते देखे गए। एनडीआरएफ के जवान बचाव के साथ लोगों तक लंच पैकेट पहुंचा रहे हैं। वहीं तीन कंपनी बाढ़ पीएसी मदद के लिए आगे आ रही है।
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90 फीसदी परिषदीय स्कूल बाढ़ में डूबे
जिले में 984 संविलियन विद्यालय हैं। इसमें से 196 विद्यालय राप्ती के तटीय इलाकों में है। जहां पांच से छह फीट पानी भरा हुआ है। ऐसे ही तिलकपुर विद्यालय है जहां बाढ़ का पानी स्कूल की छत छूने वाला है। ऐसे ही अन्य विद्यालयों की स्थिति है। जहां चार से पांच फीट पानी भरा है।
ग्रामीण सड़क पर बना रहे ठिकाना
बाढ़ का कहर गांव से ज्यादा सड़क पर देखने को मिल रहा है। बहराइच भिनगा फोरलेन के किनारे सुरक्षित निकाले गए या फिर किसी तरह बाढ़ के पानी से बाहर निकले ग्रामीण पन्नी का टेंट बना कर अपने परिवार के साथ हैं। जहां भूख से बिलखते बच्चे कहीं सूखी रोटी खाते देखे जा रहे तो कहीं सूखा चावल। कुछ स्थानों पर प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराया गया लंच पैकेट देखा गया, लेकिन वह इतना नहीं है कि वह पूरे परिवार का पेट भर सके। पेयजल की समस्या सबसे अधिक है। प्रशासन कहीं-कहीं लंच पैकेट के नाम पर पूड़ी तो उपलब्ध करा देता है। लेकिन इन विस्थापितों को पेयजल कहां से मिलेगा। इसके लिए प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस प्रबंध नहीं किया है।
तटबंध पर हो रही कटान
तिलकपुर तटबंध पर तेजी से कटान हो रही है। यहां तक कि तटबंध का एक छोटा हिस्सा शुक्रवार रात कट गया था। जिसे मिट्टी भरी बोरियों से रोका गया है। दो स्थानों पर तटबंध में दरार है। वहीं तटबंध की कटान को रोकने के लिए तटबंध के दूसरी तरफ से बोरी में मिट्टी भर कर डाली जा रही है।
जानवरों के लिए भी मुसीबत
गोशालाओं में अब तक रखे गए जानवर बाढ़ के कारण छोड़ दिए गए हैं। वहां उनके लिए खरीदा गया भूसा पानी में भीग कर सड़ चुका है। चारों तरफ पानी होने के कारण पशु भिनगा-बहराइच फोरलेन के अतिरिक्त ऊंचे स्थान पर आसरा लिए हुए हैं। लेकिन उनको चारा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन के पास कोई व्यवस्था फिलहाल नहीं है।
ग्रामीण खुद ही गिरा रहे आशियाना
धुमबोझि के मजरा भगवानपुर गांव में बाढ़ आने के कारण बब्बन, जलील, अमेरिका, अमानत, पहलवान, कुंवारे, भिनगहे, चिरकू, चकोत्तरा का घर गिर गया है। वहीं कई लोग ऐसे भी हैं, जिनका घर कट रहा है। वह घर में लगी लकड़ी व अन्य सामान को सुरक्षित करने के लिए अपना घर गिरा रहे हैं।
तीन दिनों से आवागमन बाधित
बाढ़ के कारण भिनगा-तेंदुआ मार्ग पर तीन दिनों से आवागमन बाधित है। वहीं शनिवार को भिनगा सिरसिया मार्ग पर भी पानी आ जाने के कारण आवागमन बाधित हो गया। जबकि भिनगा-लक्ष्मनपुर मार्ग पर पानी कम होने के कारण शनिवार को आवागमन बहाल हो गया। बाढ़ की विभीषिका के कारण जमुनहा के पोंदिला, पोंदली, संगमपुरवा, लक्ष्मनपुर, सुखरामपुरवा, जोगिया, धोबिहा, भालुइहा, समशेरगढ़, भिनगा इकौना, भिनगा परसा, परसा कानीबोझी, मल्हीपुर भंगहा मार्ग पर आवागमन बाधित है। जबकि कई अन्य मुख्य व संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी आ जाने से कछार के करीब 32 गांवों का आवागमन पूरी तरह से बाधित है।
डूबने से बची किशोरी
जमुनहा (श्रावस्ती)। मल्हीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम वीरपुर लौकिहा के माजरा वीरपुर गांव में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इस दौरान घर के कमरे से निकलते समय सृष्टि पाठक (16) पुत्री संतोष पाठक का पैर फिसलने से वह पानी में डूबने लगी। जिसे परिवारीजनों ने बचा लिया। वहीं हालत बिगड़ने पर उसे सीएचसी मल्हीपुर ले जाया गया। अस्पताल में चिकित्सक न होने के कारण उसे पास के एक निजी अस्पताल मे भर्ती कराया गया। जहां उसका इलाज चल रहा है। (संवाद)
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