श्रावस्ती। राप्ती नदी में आई बाढ़ ने 122 गांव के दो लाख लोगों को प्रभावित किया है। इनमें से प्रशासन ने अब तक 7,238 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है। इस बाढ़ में करीब 93,151 हेक्टेअर भूमि की फसल भी प्रभावित हुई है। जबकि शनिवार को चार लोगों की डूबने से मौत हो गई।
राप्ती में आई बाढ़ ने इस बार अपने कई रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। जिसके चलते नदी शनिवार दोपहर 12 बजे तक अपने उच्चतम जलबिंदु 129.95 मीटर पर पहुंच गई। यह खतरे के उच्चतम निशान 225 सेंटीमीटर से अधिक पर बह रही है। इस बाढ़ में जिले के 122 गांव गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इनमें जमुनहा व भिनगा तहसील क्षेत्र के 51 तो इकौना तहसील क्षेत्र के 71 गांव है। जहां के करीब दो लाख लोग पानी से पूरी तरह से घिरे हुए है। इन गांवों में सभी घरों की लगभग एक मंजिल पानी में डूबी हुई है।
सबसे ज्यादा भयावह स्थिति जमुनहा व इकौना तहसील क्षेत्र के गांवों की है। जमुनहा में राप्ती नदी नेपाल से प्रवेश करती है तो इकौना में नदी का जिले में अंतिम छोर है। इसके बाद नदी बलरामपुर जिले में प्रवेश करती है। ऐसे में पानी का सबसे अधिक दबाव इन्हीं दो तहसील क्षेत्र के तटीय इलाकों में है। जहां आपदा से सुरक्षा के लिए एनडीआरएफ व बाढ़ पीएसी की टीमें लगी हुई हैं। वह लोगों को सुरक्षित घरों से बाहर निकालने का प्रयास कर रही है।
अब तक पांच की डूबने से हुई मौत, लेखपाल अब भी लापता
राप्ती की बाढ़ की विभीषिका के कारण अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि नाव पलटने से डूबा लेखपाल अब भी लापता है। सोनवा थाना क्षेत्र के ग्राम मध्यनगर निवासिनी जमीला पत्नी इसराइल शुक्रवार रात चारपाई पर लेटी थी। इस दौरान अचानक पानी में गिरने से उसकी डूब कर मौत हो गई। भिनगा कोतवाली क्षेत्र के केशवापुर निवासी दद्दन (42) पुत्र रामतीर्थ शनिवार को गांव के लोगों के साथ सेमरी चौराहा जा रहा था। सड़क पर राप्ती नदी की बाढ़ के पानी में बहने से उसकी मौत हो गई। वहीं इसी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम दुर्गापुर केपी निवासी बृजलाल (40) पुत्र भूखन शनिवार की सुबह डिप पार करते समय कूले में डूब गया। सभी शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भिनगा भेजा गया है। वहीं इकौना में शुक्रवार को दहावर कला के मजरा बभनपुरवा निवासी बच्छराज यादव की पुत्री पुन्नी देवी (15) शुक्रवार शाम करीब 5.00 बजे नित्य क्रिया के लिए खेत गई थी। खेत की मेड़ पर पैर फिसलने के कारण वह पानी में गिर गई। जिसमें डूबने से उसकी मौत हो गई। वहीं इकौना के जानकी नगर खुर्द निवासी बड़ेलाल (25) पुत्र समयदीन शनिवार सुबह करीब 9 बजे घर के सामने रास्ते पर पानी की स्थित देखने जा रहा था। तभी एक जहरीले सर्प ने उसे डस लिया। बेहोशी की हालत में पानी में गिरने पर आसपास के लोगों ने उसे बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं छह अक्तूबर की शाम नाव से राहत सामग्री ले जा रहा लेखपाल नाव पलटने से डूब गया था। जिसका तीसरे दिन भी कोई पता नहीं चल सका।
अति प्रभावित गांव पानी से घिरे, हो रही कटान
सर्रा मधवापुर घाट, हरिहरपुर महराज नगर, संगमपुरवा, सेमरहनिया, रामपुर डिलवा, कलकलवा, जोगिया व पिपरहवा, वीरपुर, लौकिहा, बेलरी, ककरदरी, धोबिया, डेहरिया, नेवादा, गंगाभागड़, अशरफनगर, इंदवा, अमवा, शिवाजोत, शाहपुर कला, लालबोझा दर्वेश, राजापुर वीरपुर, रामपुर ककरा, बरंगा, भेजपुर, सुल्तानजोत, शिकारीचौड़ा, जोगिया व मनिकाचौक के साथ ही नकहा धर्मनगर, नीबाभारी, भवानीनगर, नारायनपुर, कोडरी खुर्द, केरवनिया, मध्यनगर, रामगढ़ी, गौहनिया, दहावरकला, कोटवा, हजरिया, मनोहरापुर, इमिलिया, लोहारतारा, मनिकौरा कोडरी, लालपुर खदरा, लैबुड़वा, मलोना खसियारी, भुतहा, जानकी नगर खुर्द, राजगढ़ गुलहरिया सहित जिले में 122 गांव बाढ़ से घिरे हुए हैं। इसमें इकौना के डिंगुराजोत, लालपुर खदरा, भवानीनगर, कोडरीदीगर व लैबुड़वा में कटान हो रही है। जिले में मौजूदा समय करीब दो लाख लोग प्रभावित हैं।
फसलों को हुआ नुकसान
जिले में 93,151 हेक्टेअर भूमि में खेती की जाती है। इसमें से लगभग सभी खेत बाढ़ की चपेट में है। लेकिन इसमें से 50 फीसदी खेत ऐसे हैं जहां पानी चार से पांच फीट ऊपर बह रहा है। यदि आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष 74,188 हेक्टेअर भूमि में धान, 15,100 हेक्टेअर भूमि में मक्का ज्वार व बाजरा, 3,095 हेक्टेअर में उर्द, अरहर व मूंग, 730 हेक्टेअर में मूंगफली व सोयाबीन तथा 510 हेक्टेअर भूमि में ढैंचा व जूट की खेती की गई थी। इसमें से लगभग सभी फसलें फिलहाल बाढ़ की चपेट में है।
अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने को बेताब राप्ती
राप्ती नदी बाढ़ का अपना रिकॉर्ड कई बार बनाकर तोड़ती रही है। लेकिन इस बार वह अपने 37 वर्ष पुराने अब तक के उच्चतम रिकॉर्ड की ओर लगातार बढ़ रही है। 12 अगस्त 2017 को नेपाल में बादल फटने के कारण उसका पानी राप्ती में आया था। उस समय राप्ती का बैराज पर अब तक का सबसे अधिक जलस्तर 130.15 मीटर दर्ज किया गया। यह राप्ती के 1985 से लेकर अब तक का सबसे अधिक जलस्तर का रिकॉर्ड किया गया था। राप्ती नदी 15 अगस्त 2014 को 129.60 मीटर पर पहुंची थी। इसके बाद 25 अगस्त 2006 को राप्ती अपने अधिकतम जलबिंदु 129.55 मीटर पर पहुंची थी। लेकिन इस वर्ष लगातार बढ़ रही राप्ती शनिवार दोपहर 12 बजे तक ही 129.95 मीटर के पैमाने पर पहुंच गई है। जो खतरे के निशान से 225 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
38 वर्ष में पहली बाद अक्तूबर माह में इतनी तबाही
राप्ती नदी में बाढ़ का इतिहास तो पुराना है। लेकिन सरकारी आंकड़ों में 24 जुलाई 1985 से आंकड़े दर्ज हैं। तब से राप्ती नदी में जून, जुलाई व अगस्त माह में ही सबसे अधिक बाढ़ आई थी। केवल 2000 व 2004 में ही सितंबर माह में बाढ़ की स्थिति बनी। लेकिन आठ अक्टूबर 2009 के बाद इस वर्ष अक्टूबर माह में बाढ़ अपने अधिकतम बिंदु से आगे पहुंच गई।
प्रशासन का दावा
जमुनहा में तेरह गांव के 11,520 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें से 1238 को बाहर निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। जबकि इकौना के 54 गांवों में 41,280 लोग बाढ़ से घिरे हें। इनमें से छह हजार लोगों को बाहर निकाला गया। भिनगा में 21 गांव के 13,220 लोग घिरे हे। लेकिन सुरक्षित हैं। जिले में कुल 88 गांव बाढ़ से घिरे हुए हें। इनमें से 66,020 लोग फंसे हुए हैं। बाढ़ प्रभवितों को एनडीआरएफ की 22 सदस्यीय टीम काम कर रही है। तीन प्लाटून पीएसी, 12 मोटर बोट व कई छोटी नावें लगाई गई हैं। अभी तक जिले में किसी भी व्यक्ति के बाढ़ से मृत्यु की सूचना की पुष्टि नहीं हुई है। -नेहा प्रकाश, जिलाधिकारी