श्रावस्ती। शारदीय नवरात्र की शुरूआत रविवार को होगी। इसके पहले दिन से मां के दरबार में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ेगा। इसको लेकर मंदिरों तथा घरों में भक्तों ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं सजाई गई है।
कलश स्थापना के साथ-साथ मां देवी भगवती की आराधना शुरू की जाएगी। इसके लिए सुबह छह बजे से लेकर 12:20 तक का विशेष मुहूर्त है। इस बार भक्तों को पूरे नौ दिन देवी के पूजन व व्रत रहने का अवसर मिलेगा। देवी पूजन के लिए जिले में कहीं मां वैष्णो देवी की गुफा बनाई जा रही है तो कहीं रात्रि जागरण की तैयारी चल रही है।
इस पर जिले में 314 स्थानों पर दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। वहीं पर्व से एक दिन पूर्व शनिवार को बाजार में लोगों की भारी भीड़ देखी गई। श्रद्धालु पूजन सामग्री व जरूरत के अन्य सामानों की खरीदारी में जुटे रहे। नारियल, चुनरी, फूल-माला व भगवती की प्रतिमाओं की बिक्री के लिए जगह जगह दुकानें सजी नजर आईं। वहीं मिट्टी के कलश की बिक्री भी खूब हुई।
यहां यह हो रही तैयारी
भिनगा के खैरीमोड़ स्थित झारखंडी मंदिर में भक्तों को मां वैष्णो देवी की गुफा के दर्शन कराए जाएंगे। वहीं ईदगाह चौराहे पर देवी प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। यहां रात्रि जागरण सहित अन्य कार्यक्रम होंगे। व्यास भवन व खलवा बाजार में भी देवी प्रतिमा व कलश की स्थापना होगी।
कलश स्थापना की विधि
पंडित केशरी कुमार पांडेय ने बताया कि नवरात्र में कलश स्थापना का विशेष महत्व है। कलश स्थापना को घट स्थापना भी कहा जाता है। नवरात्र की शुरुआत घट स्थापना के साथ ही होती है। घट स्थापना के लिए नवरात्र के पहले दिन सुबह स्नान कर पूजा का संकल्प लें। मिट्टी की वेदी पर जौ को बोएं, कलश की स्थापना करें, गंगा जल रखें। इस पर कुल देवी की प्रतिमा या फिर लाल कपड़े में लिपटे नारियल को रखें और पूजन करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि कलश की जगह पर नौ दिन तक अखंड दीप जलता रहे।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
शुभ समय - सुबह 6.01 से 7.24 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त - 11.33 से 12.20 तक
सर्वार्थ सिद्धि योग
इस साल नवरात्र इसलिए भी खास है क्योंकि इस बार 4 सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। ऐसे में साधकों को सिद्धि प्राप्त करने के पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं। 29 सितंबर, 2, 6 और 7 अक्तूबर को यह शुभ योग बन रहा है।
शुभ संयोग में होगी कलश स्थापना
इस बार कलश स्थापना के दिन ही सुख समृद्धि के कारक ग्रह शुक्र का उदय होना बेहद शुभ है। शुक्र का संबंध देवी लक्ष्मी से है। नवरात्र के दिनों में देवी के सभी रूपों की पूजा होती है। रविवार को नवरात्र का प्रारंभ इस बार कलश स्थापना के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और द्विपुष्कर नामक शुभ योग में होगा।