श्रावस्ती। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इस लाइन को स्पोर्ट्स स्टेडियम भिनगा के दिव्यांग खिलाड़ियों ने चरितार्थ किया है। खिलाड़ियों ने राज्य स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
दिव्यांगजनों को सम्मान प्रदान करने के लिए शासन की ओर से विगत वर्षों की भांति इस बार भी तीन दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस मनाया जा रहा है। स्पोर्ट्स स्टेडियम भिनगा में पैरा खेलों का प्रशिक्षण ले रहे चार दिव्यांगों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा की छाप छोड़ी है। इनमें पैर से दिव्यांग धर्मेंद्र कुमार ने चेन्नई में आयोजित 23 वीं राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल व 200 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया। इसी तरह से दिल्ली में आयोजित द्वितीय खेलो इंडिया पैरा गेम्स के दौरान 400 व 200 मीटर दौड़ में रजत पदक हासिल किया।
इसी क्रम में मानसिक दिव्यांग भूषन ने बेंगलूर में आयोजित सातवीं इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में 1500 मीटर व 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीता। इसी तरह से दुबई में आयोजित विश्व पैरा ग्रैंड प्रिक्स चैंपियनशिप में प्रतिभाग कर छठा स्थान हासिल किया। वहीं, नेत्र दिव्यांग अर्पित ने शामली में आयोजित उत्तर प्रदेश पैरा गेम्स में 1500 दौड़ में रजत पदक जीता। ऐसे ही पवन डागुर ने बेंगलूर में आयोजित ओपन पैरा अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 1500 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
निरंतर अभ्यास ने निखारी प्रतिभा
खिलाड़ियों को उपलब्ध संसाधनों का भरपूर लाभ मिल सके इसके लिए निरंतर अभ्यास कराया जाता है। एथलेटिक्स कोच विवेक कुमार की निगरानी में निरंतर अभ्यास व खिलाड़ियों की लगन व मेहनत ने दिव्यांगता को पीछे छोड़ दिया है। - शिवकुमार यादव, जिला क्रीड़ाधिकारी