श्रावस्ती। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में हादसों में कमी लाने के लिए सड़कों को दुरुस्त करवाने, यातायात नियमों का पालन सख्ती से लागू करवाने, ब्लैक स्पॉट चिह्नित कर वहां जरूरी उपाय करने आदि के निर्देश दिए थे, लेकिन तराई में इस पर ध्यान नहीं दिया गया। नतीजतन तराई में हादसे में होने वाली मौतों व घायलों की संख्या 38.5 प्रतिशत बढ़ गई है।
शासन की ओर से हादसों में होने वाली मौतों की एक सूची जारी की गई है, जिसमें श्रावस्ती को प्रदेश भर में नौवां स्थान मिला है। शासन की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में वर्ष 2024 में जनवरी से अगस्त तक 73 हादसे हुए थे और उनमें 52 लोगों की मौत व 39 लोग घायल हुए थे। वहीं वर्ष 2025 में 106 हादसों में 72 लोगों की मौत व 75 लोग घायल हुए हैं। इन मौतों का आंकड़ा 2024 की अपेक्षा 38.5 प्रतिशत अधिक है।
अगस्त 2024 में आठ हादसों में एक मौत और 10 लोग घायल हुए थे, जबकि अगस्त 2025 में हुए 17 हादसों में 18 मौत व 14 लोग घायल हुए हैं, जो चिंताजनक है।
यातायात नियमों की अनदेखी भी बन रही मौतों का कारण
तराई में हादसों व घायलों की संख्या में हुई अप्रत्याशित वृद्धि में जहां एक ओर जिले के जिम्मेदार हुक्मरानों की लापरवाही कारण है तो दूसरी ओर यातायात नियमों की अनदेखी भी उतनी ही जिम्मेदार है। पोस्टमार्टम हाउस के एक जिम्मेदार के मुताबिक सड़क हादसों में हुई मौतों में 60 प्रतिशत मौतें हेडइंजरी के चलते हुई हैं, जिसका कारण बाइक सवारों का हेलमेट न लगाना है।
सड़कों की साइडों पर गड्ढे व झाड़ियां
भिनगा से बहराइच जाने वाले फोरलेन की पटरियां कई महीनों से जानलेवा हैं। सड़क जगह-जगह किनारे से धंसी है और राहगीर घायल हो रहे हैं। सबसे ज्यादा घातक साइडों पर उगीं झाड़ियां और झाड़ियों में स्थित गड्ढे हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं।
चार किमी में 18 जानलेवा गड्ढे
भिनगा-बहराइच फोरलेन को बौद्ध परिपथ से जोड़ने वाले लक्ष्मणनगर-गिलौला मार्ग पर भी कई स्थानों पर जानलेवा गड्ढे हैं। आलम यह है कि तिलकपुर मोड़ पहुंचने से पहले चार किलोमीटर के दायरे में एक पटरी पर 18 से अधिक जानलेवा गड्ढे हैं। बाइक व बड़े वाहन चालक अचानक गड्ढों से बचने के लिए दूसरी पटरी पर जाते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं।
दर्जनों गड्ढे और बिखरी पड़ीं बजड़ियां
जमुनहा तहसील से बहराइच जाने वाला मुख्य मार्ग भी गड्ढों की जद में हैं, जगह-जगह जानलेवा गड्ढे हैं। यही हाल भिनगा-इकौना मार्ग का भी है। सड़क के बीच में व साइड में बड़े-बड़े गड्ढे हैं और बजड़ियां बिखरी पड़ी हैं।