अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में आरोपियों की रिमांड को लेकर की गई आपत्ति पर मंगलवार को अदालत में करीब दो घंटे तक बहस हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा ने पत्रावली आदेश के लिए सुरक्षित कर ली। अदालत अब दो सितंबर को इस पर आदेश सुनाएगी।
आरोपियों की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि आरोपी लोक सेवक नहीं हैं। चोरी की संपत्ति छिपाने का भी आरोप उन पर नहीं बनता। उन्होंने कहा कि आरोपियों पर लगाए गए अपराधों में अधिकतम सजा सात वर्ष तक है। ऐसे में उन्हें जेल में रखने के बजाय रिहा किया जाना चाहिए। जवाब में अभियोजन पक्ष ने आरोपों को सही बताते हुए अपना पक्ष रखा। अभियोजन की ओर से कहा गया कि राम मंदिर सार्वजनिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे स्थान पर चढ़ावे की धनराशि से जुड़ा अपराध गंभीर है और इसे भ्रष्टाचार के दायरे में माना जाना चाहिए।
सात अगस्त को दी गई थी रिमांड को चुनौती
जेल में बंद रमा शंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश, अनुकल्प, लवकुश, मनीष कुमार, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव की ओर से सात अगस्त को अदालत में रिमांड पर आपत्ति दाखिल की गई थी। इसमें कहा गया था कि मामले के विवेचक ने आरोपियों के खिलाफ गलत धाराओं में रिमांड पेश किया है।
पेंशन खाते से रोक हटाने पर अब एक सितंबर को आएगा फैसला
अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पेंशन खाते से निकासी पर लगी रोक हटाने के आवेदन पर मंगलवार को अदालत में दोनों पक्षों ने अपने तर्क रखे। सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा ने पत्रावली आदेश के लिए सुरक्षित कर ली। अदालत ने फैसला सुनाने के लिए एक सितंबर की तारीख तय की है। आरोपी ने अदालत को बताया था कि वह बैंक का सेवानिवृत्त कर्मचारी है और उसकी पेंशन बैंक के खाते में आती है। खाते पर रोक लगने से परिवार के रोजमर्रा के खर्च चलाने और हर महीने की किस्तें जमा करने में परेशानी हो रही है।