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एल वन हास्पिटल में मरीजों को पालीथिन में मिल रहा खाना, मरीजों ने किया ऐतराज

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श्रावस्ती। कोविड मरीजों के लिए बने एल वन हॉस्पिटल में मरीजों को पॉलीथिन में खाना परोसा जा रहा है। यह खाना बनने के बाद करीब एक घंटे पहले संयुक्त जिला चिकित्सालय के किचन से पैक होकर भंगहा एलवन हास्पिटल भेजा जाता है। मरीज पॉलीथिन में पैक खाने को लेकर ऐतराज कर रहे हैं। वहीं एलवन हॉस्पिटल से निकला मेडिकल कचरा भी लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। हाल यह है कि मेडिकल कचरा उठाने वाली संस्था कभी चार दिन तो कभी पांच दिन बाद कचरा उठाने के लिए वाहन भेज रही है। इससे बायोमेडिकल वेस्ट से लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। यही नहीं हॉस्पिटल के अंदर तो सफाई है लेकिन बाथरूम की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। यहां व्याप्त गंदगी के कारण मरीजों की मुश्किलें और बढ़ रही हैं।
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कोरोना पॉजिटिव मिलने पर मरीजों को एलवन हास्पिटल भंगहा भेजा जाता है। इस हॉस्पिटल में एक साथ 50 मरीजों को रखने की व्यवस्था है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को बिस्तर के साथ स्वच्छ पेयजल, भोजन व नाश्ता के साथ आवश्यक दवाएं देने का प्रावधान है। लेकिन असल में मरीजों को सब कुछ मानक के अनुसार नहीं मिल रहा है।
अस्पताल में भर्ती मरीजों को दोनों वक्त मिलने वाला भोजन पॉलीथिन में पैक कर के दिया जा रहा है। संयुक्त जिला चिकित्सालय में भोजन आपूर्ति करने वाली संस्था द्वारा अपना किचन बनाया गया है। जहां बना हुआ गर्म खाना पहले पॉलीथिन में पैक किया जाता है, उसके बाद उसकी आपूर्ति की जाती है।
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खाना पैक करने से लेकर हॉस्पिटल के अंदर तक पहुंचाने में लगभग एक घंटे से अधिक का समय लग जाता है। ऐसे में मरीजों को इस बात को लेकर ऐतराज है कि प्रतिबंधित पॉलीथिन में गर्म पैक खाने से कोरोना के साथ ही उन्हें कहीं दूसरी बीमारी न जकड़ ले। ऐसे में मरीज पॉलीथिन में पैक खाने को लेकर अपना रोष फोन के माध्यम से स्वास्थ्य अधिकारी व मीडिया के समक्ष व्यक्त कर रहे हैं।
सफाई व मेडिकल कचरे को लेकर भी व्यवस्था ध्वस्त
एलवन हॉस्पिटल में मेडिकल कचरा उठाने के लिए स्पैक्ट्रम नाम की संस्था नामित है। लेकिन यह संस्था प्रतिदिन मेडिकल कचरा उठाने के बजाए चौथे व पांचवे दिन ही हॉस्पिटल आती है। जिसके चलते कोरोना संक्रमित मरीजों का उपयोग किया गया सामान बरामदे में ही इधर उधर पड़ा रहता है। जिसके चलते अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों में संक्रमण की संभावना बनी रहती है। साथ ही पूरा वातावरण प्रदूषित रहता है।
यही नहीं अस्पताल में तैनात सफाई कर्मचारियों की संख्या इतनी कम है कि बाथरूम गंदगी से अटा रहता है। इसको लेकर भी मरीजों ने स्वास्थ्य अधिकारियों सहित प्रशासन को सोशल मीडिया के माध्यम से शौचालय व अस्पताल के आंतरिक व्यवस्थाओं की फोटो भेज कर शिकायत की है।
यह है खाने का मानक
एल वन हॉस्पिटल में परोसा जाने वाला खाने का मेन्यू जननी सुरक्षा योजना के तहत बनाए गए मेन्यू को ही लागू किया गया है। इसके लिए प्रति मरीज पर प्रतिदिन 100 रुपये अनुमन्य है। लेकिन संस्था ने खाने की आपूर्ति के लिए 90 रुपये में टेंडर लिया था। इस टेंडर के मुताबिक मरीजों को दाल चावल रोटी सब्जी के साथ दूध व अंडा देने का प्रावधान है। जबकि नाश्ते में दूध चाय के साथ स्नैक्स भी दिया जाना था। लेकिन वास्तव में स्थिति इससे भिन्न है। कोरोना मरीजों को नाश्ते में दूध और अंडा नहीं दिया जा रहा।
एल वन हॉस्पिटल मे मेडिकल कचरा उठाने को लेकर शिकायत मिली थी। जिस पर संस्था को नोटिस भेजी गई है। हॉस्पिटल में सफाई को लेकर भी कुछ कर्मचारियों को नोटिस दी गई है। यदि इसके बाद भी कर्मचारी अपने कार्यों में रुचि नहीं लेते हैं तो उनके विरुद्ध कोविड प्रोटोकॉल के तहत मामला दर्ज कराया जाएगा। जहां तक पॉलीथिन में खाना देने की बात है तो यह व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी। - डॉ. मुकेश मातनहेलिया प्रभारी सीएमओ
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