श्रावस्ती। तराई में कई दिनों से उमड़ घुमड़ रहे मेघ रविवार को झूम कर बरसे। ऐसे में पानी के अभाव में सूख रही धान की फसलों के लिए यह बरसात संजीवनी मानी जा रही है। वहीं उमस भरी गर्मी से जूझ रहे लोगों को सावन की इस बरसात ने काफी हद तक राहत दिलाई है। कई दिनों से आसमान निहार रहे किसानों की मेघों ने आस पूरी कर दी है। इस बरसात के बाद कई स्थानों पर कीचड़ व जलभराव की समस्या भी उत्पन्न हो गई। जिससे लोगों की दुश्वारियां भी बढ़ी है।
वहीं नेपाल सहित पहाड़ों पर होने वाली मूसलाधार बरसात के बाद राप्ती सहित भकला नदी, बूढ़ी राप्ती के साथ ही सिरसिया क्षेत्र के पहाड़ी नालों का जलस्तर भी बढ़ गया। ऐसे में सिरसिया के सोहेलवा, जमुनहा के ककरदरी व हरदत्त नगर गिरंट सहित भिनगा जंगल एक बार फिर पानी से लबालब हो गया है। वहीं खेतों में पर्याप्त पानी देख एक बार फिर सिरसिया क्षेत्र में किसानों ने धान की रोपाई का कार्य प्रारंभ कर दिया है।
जिले में विगत डेढ़ सप्ताह से बरसात नहीं हो रही थी। इससे किसान सूखे की संभावनाओं को लेकर निराश देखे जा रहे थे। ऐसे में शनिवार को आसमान पर अचानक घने काले बादल छा गए। जिनके द्वारा सिरसिया क्षेत्र में किसानों की आस पूरी कर दी गई। जिससे जिले के अन्य क्षेत्रों के किसान भी बरसात को लेकर आशान्वित नजर आए। उनकी आस भी रविवार को पूरी हो गई। रविवार भोर शुरू हुई झमाझम बरसात रुक रुक कर करीब एक घंटे तक जारी रही।
इसके बाद चली पूर्वा हवा के साथ पड़ी सावन की फुहारों ने लोगों को भीषण उमस भरी गर्मी से काफी हद तक राहत दिला दी। तेज बरसात के बाद जहां खेत पानी से सराबोर हो गए। वहीं जिले के जंगल भी पानी से लबालब हो गए। इस बरसात के कारण जहां जलाभाव में सूख रही धान की फसलों को मानो संजीवनी मिल गई। वहीं पानी के अभाव में सिरसिया क्षेत्र में बाधित हुआ धान की रोपाई का कार्य भी तेजी से चल पड़ा है।
इस बरसात का खेतों में लगी मक्का, मूंगफली, गन्ना सहित सब्जियों की फसल को फायदा होगा। वहीं बरसात के कारण भिनगा व इकौना नगर सहित जिले के अन्य कस्बों, बाजारों व गांवों में जगह-जगह कीचड़ व जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई। जिससे लोगों की परेशानी भी बढ़ी है। वहीं बरसात के कारण जमुनहा क्षेत्र में राप्ती व भकला नदी के साथ हरिहरपुररानी क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती सहित सिरसिया क्षेत्र में बहने वाले पहाड़ी नालों का जलस्तर भी बढ़ गया है। ऐसे में आसमान पर छाए बादलों को देख बाढ़ की संभावनाओं को लेकर कछार वासियों की धड़कने भी बढ़ने लगी है।