श्रावस्ती। गांवों में साफ सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसका खुलासा ककरदरी गांव में डीएम के निरीक्षण के दौरान हुआ था। इसके बाद डीपीआरओ ने शनिवार को स्वयं ककरदरी गांव पहुंचकर सफाई कर्मियों के साथ स्वच्छता अभियान चलाया। गांव में सफाई कर्मी सहित ग्रामीणों को स्वच्छता के मानक बताए। वहीं जिले के सभी एडीओ पंचायत को निर्देशित किया कि वह टीम बनाकर गांवों की सफाई कराएं।
जिले की सभी ग्राम पंचायतों में सफाई कर्मी तैनात हैं। इसके बाद भी गांवों में ठीक से सफाई नहीं हो पा रही है। सफाई कर्मी केवल सड़क पर झाड़ू लगा कर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। इसका खुलासा अधिकारियों की जांच में ही हो रहा है। कुछ दिन पूर्व डीएम ककरदरी गांव के निरीक्षण में गई थी। वहां पर उन्हें गांव के अंदर गंदगी मिली।
जिसको लेकर उन्होंने नाराजगी जताई थी। इसी के बाद गांव पहुंची डीपीआरओ ने शनिवार को सफाई कर्मियों की टीम बनाकर सफाई अभियान चलवाया। स्वयं मौके पर खड़े होकर गांव में सैनिटाइजेशन, चूना व ब्लीचिंग का छिड़काव, नाली की सफाई कराई। इसके बाद डीपीआरओ ने जिले के सभी एडीओ पंचायत को टीम बना कर गांवों की सफाई के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए।
सफाई कर्मी के साथ ग्रामीण भी जिम्मेदार
ककरदरी गांव में स्वच्छता को लेकर डीएम की ओर से जताई गई नाराजगी के लिए जितना जिम्मेदार सफाई कर्मी थे, उससे कहीं अधिक जिम्मेदार ग्रामीण भी थे। इसका कारण था कि गांव में ही ग्रामीणों ने घूर गड्ढा लगा रखा था। लगभग सभी घरों के लोग अपना कूड़ा अपने ही दरवाजे पर या फिर सड़क पर फेंक रहे थे। घर का गंदा पानी खड़ंजे पर निकाला जा रहा था। जबकि ग्रामीण इसके लिए घर में ही गड्ढा खोद कर शोक पिट बना सकते थे। ऐसे ही ग्रामीण सड़क का इस्तेमाल पशु बांधने के लिए कर रहे थे। इसके चलते पशुओं का गोबर सड़क पर ही पड़ा रहता है।
ककरदरी गांव में कुछ दिन पूर्व डीएम ने निरीक्षण किया था, जहां गंदगी पाई गई थी। इसी के बाद अभियान चला कर उस गांव की सफाई कराई गई। इसी तरह का अभियान सभी गांव पंचायतों में चलना है। इसके लिए एडीओ पंचायत को निर्देश दिया गया है कि वह टीम बना कर सभी गांवों में सफाई, सैनिटाइजेशन, फॉगिंग, चूना व ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराएं। साथ ही नाली के साथ गांव के घूर गड्ढों की सफाई कराएं। जांच के दौरान यदि किसी पंचायत में गंदगी पाई जाती है तो इसके लिए सफाई कर्मी के साथ ही वह स्वयं भी जिम्मेदार होंगे। - किरन, डीपीआरओ