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Shravasti News: सीताद्वार झील में अब नहीं सुनाई पड़ता प्रवासी पक्षियों का कलरव

Mon, 02 Feb 2026 12:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
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सीताद्वार झील।- संवाद
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श्रावस्ती। विश्व पटल पर अपनी पहचान रखने वाले श्रावस्ती जिले में अब तक 145 स्थानों को वेटलैंड के रूप में चिह्नित किया जा चुका है। वहीं, एक जिला एक वेटलैंड के रूप में सीताद्वार झील का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। फिर भी प्रवासी पक्षियों को लुभाने में संबंधित विभाग कामयाब होता नहीं दिख रहा है। कई बार सीताद्वार झील को लेकर राजनीतिक व प्रशासनिक स्तर पर की गई घोषणा भी हवा में ही तैरती नजर आ रही है।
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वेटलैंड (आर्द्रभूमि) को संरक्षित करने के लिए धरातल पर कोई प्रयास नजर नहीं आ रहा है। पौराणिक महत्व रखने वाली सीताद्वार झील में जहां पहले हजारों प्रवासी पक्षियों के झुंड दिखाई पड़ते थे, वहीं अब कभी-कभी ही विदेशी पक्षी दिखाई पड़ते हैं।

श्रावस्ती आने वाले पर्यटक भी विदेशी पक्षियों को देखने के लिए सीताद्वार झील तक आते थे, लेकिन झील में बढ़ती जलकुंभी व घटती पक्षियों की संख्या से पर्यटकों का मोह भंग हो चुका है। हालांकि सीताद्वार झील को संरक्षित करने के साथ ही उसकी सफाई व सुंदरीकरण के लिए विभाग ने शासन को पत्र लिखकर बजट व एक जिला एक वेटलैंड का दर्जा देने की मांग की है।
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सुस्त हुई वेटलैंड संरक्षण समिति की कवायद
जिले में ग्राम खजुहा, झुनझुनिया व कसियापुर के पास राप्ती नदी के खाली स्थान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने व शरद ऋतु में आने वाले विदेशी पक्षियों की सुरक्षा के लिए राप्ती वेटलैंड पक्षी संरक्षण एवं संवर्धन समिति के गठन की कवायद शुरू हुई थी। इसके संरक्षक के रूप में पदेन एसपी को रखने का प्रस्ताव तैयार किया गया। इसके लिए तत्कालीन एसपी घनश्याम चौरसिया ने संरक्षण व विकास का बीड़ा उठाया था। उसके बाद उनका स्थानांतरण होने से समिति के गठन की चर्चा थम गई।


धरातल पर नहीं उतरा झूलने वाला रेस्टोरेंट
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तत्कालीन डीएम नेहा प्रकाश ने सीताद्वार झील के सुंदरीकरण के लिए सफाई कराने के साथ ही झील में झूलने वाले रेस्टोरेंट के मॉडल का शुभारंभ किया था, किंतु समय बीतने के साथ ही सुंदरीकरण का काम भी ठप हो गया और झूलने वाले रेस्टोरेंट का माॅडल भी धरातल पर नहीं उतर सका।



किया जाएगा हर संभव प्रयास
सीताद्वार झील में प्रवासी पक्षी के रूप में सुरखाब, इंडियन कारमोरवेंट, ब्लैक स्टार्क, चकवा-चकवी, कलहंस, पीलक, पेलीकन, साइबेरियाई क्रेन, टिटिहरी आदि पक्षी आते हैं। इन्हें लुभाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
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- धनराज मीणा, डीएफओ
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