श्रावस्ती। सवा करोड़ का फर्जीवाड़ा करने वाले भिनगा नगर पालिका के चेयरमैन का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले डीएम ने जांच कराकर उन पर करोड़ों रुपये के गबन का आरोप लगाते हुए शासन को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था। इसके साथ ही 2012 से लेकर अब तक कई मामलों में उनके विरुद्ध केस दर्ज किया गया है। यहां तक कि जिले के प्रभारी मंत्री ने भी उनके पूर्व कार्यकाल के कार्यों की जांच कराकर कार्रवाई करने का पत्र नगर विकास मंत्री को लिखा था। इसके बाद भी सभी मामले या तो दबते रहे या फिर कागजों में दौड़ते रहे। आखिर में सवा करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में चेयरमैन पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
नगर पालिका परिषद भिनगा के चेयरमैन अजय आर्य का प्रारंभ से ही विवादों से नाता रहा। पहले अपनी विवादित कार्यशैली पर पर्दा डालने के लिए वह तात्कालिक सरकार के समर्थन के लिए सपा के बैनर तले आ गए, लेकिन जैसे ही सरकार बदली वह भाजपा की शरण में आ गए। यहां विगत कार्यकाल में भाजपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिला संयोजक बन गए। यह राजनीतिक पद केवल अपनी गलतियों को छिपाने के लिए लिया।
वहीं दूसरी ओर प्रशासन भले उनके कृत्यों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा था, लेकिन जांच प्रक्रिया चल रही थी। 18 अगस्त 2017 को ऐसी ही एक जांच तात्कालिक डीएम ने कराई। इसमें पांच टीमें गठित हुई थी। इस टीम ने नगर पालिका के अंदर आय व्यय, निर्माण कार्य, सोलर लाइट अधिष्ठापन व वार्डों की सफाई का गहन परीक्षण किया। इस परीक्षण में निर्माण कार्यों में प्रथम दृष्टया एक करोड़ बारह लाख रुपये की धांधली के साथ ही कई अन्य कमियों की पुष्टि हुई थी।
इस पर डीएम ने निदेशक स्थानीय निकाय निदेशालय को पत्र संख्या 24175/ एसटी/ दिनांक 18 अगस्त को पत्र लिख कार्रवाई करने की संस्तुति की थी। इस पर कार्रवाई न होने पर डीएम ने फिर पांच अक्तूबर 2017 को प्रमुख सचिव नगर विकास को पत्र लिखते हुए उसकी कॉपी विशेष सचिव नगर विकास को भेजते हुए प्रशासनिक व वित्तीय अनियमितताओं को संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई की मांग की थी। यह पत्र शासन में जाकर दबते रहे।
वहीं पुलिस अभिलेखों में भी चेयरमैन व अन्य के खिलाफ भिनगा कोतवाली में मामले दर्ज हैं। इनमें से कई की चार्जशीट या तो न्यायालय पहुंच चुकी है, या फिर जांच ही विचाराधीन है। इन सबके बावजूद आरोपी चेयरमैन किसी न किसी प्रकार से सत्ता के गलियारे का लाभ लेते हुए अपने कार्यों पर पर्दा डालता रहा। वहीं एक अन्य मामले में जब पीड़ित ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो पुलिस हरकत में आई, और जांच प्रक्रिया तेज कर चेयरमैन की गिरफ्तारी की।