श्रावस्ती/इकौना। जिले के कस्बे, बाजार, मार्ग व गलियां छुट्टा गोवंशों व मवेशियों का आश्रय स्थल बने हुए हैं। इनके कारण आए दिन दुर्घटनाएं भी घटित हो रही है। इसके बाद भी न तो नगर पालिका व नगर पंचायत इन्हें संरक्षित करा रही है और न ही संबंधित ग्राम पंचायत ही। जिसके चलते आए दिन लोग काल के गाल में समा रहे हैं।
जिले में 64 गोआश्रय स्थल संचालित हैं। इनमें मात्र 1100 गोवंश ही संरक्षित किए गए हैं। शेष गोवंश खुले घूम रहे हैं। पशु एक तरफ किसानों की फसल चट कर रहे हैं वहीं सड़क पर आश्रय ले रहे हैं। इसके कारण आए दिन लोग हादसे का शिकार भी हो रहे हैं। इकौना में 300 गोवंश की क्षमता वाली कान्हा गोशाला में मात्र सोलह गोवंश ही संरक्षित किए गए हैं।
जबकि भिनगा में भूमि चयन के बाद भी अभी इसका निर्माण नहीं कराया गया है। यही स्थिति वृहद गोशाला स्थल का भी है। जहां पांच सौ गोवंशों को संरक्षित किया जा सकता है। इनमें से मात्र एक वृहद गोशाला का संचालन हो रहा है। जिसमें 107 गोवंश ही संरक्षित हैं। वहीं इकौना के जयचंद पुर कटघरा, सेमगढा व सिरसिया के मोतीपुर कला में यदि वृहद गौशाला का निर्माण पूरा करा दिया जाए तो 1500 गोवंशों को संरक्षित किया जा सकता है। इसके बावजूद इस पर जिला प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा है।
यह हैं जिम्मेदार
नगर पालिका व नगर पंचायत सीमा क्षेत्र में छुट्टा गोवंशों को संरक्षित कराने की जिम्मेदारी संबंधित ईओ की है। जबकि ग्राम पंचायतों में इन्हें संरक्षित कराने की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव सहित लेखपाल की है। जिनकी लापरवाही के कारण गोवंश छुट्टा घूम रहे हैं। जो आए दिन किसी न किसी की मौत का कारण बन रहे हैं।
नगर निकाय जिम्मेदार
संरक्षित गोवंशों के सुपरवीजन के लिए सिर्फ हम नोडल अधिकारी की भूमिका में हैं। उन्हें संरक्षित करने की जिम्मेदारी संबंधित नगर निकाय व ग्राम पंचायत की है। ऐसे में जवाबदेही भी उन्हीं की है। - डाॅ. मानव, सीवीओ