तपोस्थली में पूजा करते अनुयायी। - संवाद
कटरा। बर्मा के अनुयायियों का 30 सदस्यीय दल सोमवार को तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु लिंकारासारा के नेतृत्व में गंधकुटी पर अपने रीति-रिवाज के अनुसार पूजा-अर्चना की। इस दौरान आयोजित बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु लिंकारासारा ने कहा कि भगवान बुद्ध अहिंसा को मानते थे। उन्होंने जीव-जंतुओं की रक्षा करने के लिए वर्षावास पूजा की विधि बताई, ताकि वर्षावास के दौरान भिक्षु विचरण न करें और उनके पैरों के नीचे आकर बरसाती जीवों को प्राण न गंवाना पड़े। सभा के बाद अनुयायियों ने विभिन्न स्थलों का भ्रमण कर उनके इतिहास की जानकारी ली। इस दौरान तपोस्थली बुद्धम शरणम गच्छामि, धम्मम शरणम गच्छामि, संघम शरणम गच्छामि के जयघोष से गूंजती रही।