बोधि वृक्ष की पूजा करते बौद्ध अनुयायी। - स्रोतः संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को बरमा से आए अनुयायियों के 60 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु भंवरानंद के नेतृत्व में बोधि वृक्ष का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया। बौद्ध सभा में प्रेत योनि की जानकारी देते हुए भिक्षु भंवरानंद ने बताया कि एक दिन थेर महामोग्गलान व लक्ष्मण थेर राजगृह में भिक्षाटन कर रहे थे।
चलते-चलते महामोग्गलान अचानक मुस्कराने लगे। लक्ष्मण थेर ने जब इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि विहार वापस पहुंचकर शास्ता (बुद्ध) के सामने बताएंगे। भिक्षाटन समाप्त कर दोनों विहार पहुंचे। तब महामोग्गलान ने बताया कि उन्होंने एक ऐसा प्रेत देखा था, जिसका सिर मनुष्यों की तरह था और शरीर सांप का था। इस पर शाक्य मुनि ने बताया कि उन्होंने भी इस प्रेत को संबोधि प्राप्ति के दिन देखा था, लेकिन उन्होंने इसका जिक्र इसलिए नहीं किया कि लोग विश्वास नहीं करेंगे।