बौद्ध तपोस्थली में पूजा अर्चना करते अनुयायी।
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को अनुयायियों से गुलजार रही। वर्मा से आए बौद्ध अनुयायियों ने सभा मंडप में भिक्षु दीपालोक महाथेरों के नेतृत्व में विशेष पूजा की। इस दौरान उनकी ओर से किए गए उद्घोष से तपोस्थली बुद्धम शरणम गच्छामि से गूंज उठी।
विशेष पूजा के दौरान भिक्षु दीपालोक महाथेरों ने कहा कि श्रावस्ती में पूजा करने से मनुष्य के दुखों का निवारण होता है। भगवान बुद्ध के धर्म प्रचार से बौद्ध भिक्षुओं की संख्या दुनिया में बढ़ने लगी। बड़े बड़े राजा व महाराजा भी उनके शिष्य बनने लगे। भिक्षुओं की संख्या बढ़ने पर बौद्ध संघ की स्थापना की गई। बाद में लोगों के आग्रह पर बुद्ध ने स्त्रियों को भी संघ में लेने के लिए अनुमति दे दी, यद्यपि इसे उन्होंने उतना अच्छा नहीं माना।
भगवान बुद्ध ने ‘बहुजन हिताय’ लोक कल्याण के लिए बौद्ध धर्म का देश विदेश में प्रचार करने के लिए बौद्ध भिक्षुओं को भेजा। अशोक आदि सम्राटों ने भी विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रचार में अपनी अहम भूमिका निभाई।
मौर्यकाल तक आते आते भारत से निकलकर बौद्ध धर्म चीन, जापान, कोरिया, मंगोलिया, वर्मा, थाईलैंड, श्रीलंका आदि देशों में भी फैल चुका था। इन देशों में बौद्ध धर्म बहुसंख्यक है। पूजन के उपरांत सभी उपासकों ने कच्ची कुटी, पक्की कुटी, अंगुलिमाल स्तूप, ओड़ाझार आदि का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु इंद्रसेन, नागपाल, माता विद्यावती आदि उपासक मौजूद रहे।