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थाईलैंड से आए बौद्ध उपासकों ने की पूजा

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श्रावस्ती में गंध कुटि पर विशेष पूजा करते अनुयायी। - फोटो : SRAWASTI
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में शनिवार को थाईलैंड से आए उपासकों ने विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना की। इस दौरान गंध कुटि पर अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो के नेतृत्व में पूजन अर्चन किया। इसके बाद बौद्ध उपासकों ने तपोस्थली के विभिन्न मूमेंटों का भ्रमण कर उनकी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की।
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बौद्ध भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो ने कहा कि बुद्ध के अनुसार मानव जीवन दुखो से परिपूर्ण है। प्रथम आर्य सत्य में बुद्ध ने बताया है कि संसार में सभी वस्तुएं दुखमय है। उन्होंने जन्म और मरण के चक्र को दुखों का मूल कारण माना। बताया कि किसी भी धर्म का मूल उद्देश्य मानव को इस जन्म और मृत्यु के चक्र से छुटकारा दिलाना होना चाहिए।
दूसरे आर्य सत्य में बुद्ध ने दुख उत्पन्न होने के अनेक कारण बताए। इन सभी कारणों का मूल तृष्णा को बताया। तीसरे आर्य सत्य के अनुसार दुख निरोध के लिए तृष्णा का उन्मूलन आवश्यक है। संसार में प्रिय लगने वाली वस्तुओं कि इच्छा को त्यागना ही दुख निरोध के मार्ग कि ओर ले जाता है। चौथे आर्य सत्य में बुद्ध ने दुख निरोध के मार्ग को बताया है।
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बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग को इसके लिए उपयुक्त बताया। बुद्ध के अनुसार इस मार्ग का पालन करने से मनुष्य कि तृष्णा खत्म हो जाती है और उसको निर्वाण प्राप्त हो जाता है। बुद्ध ने निर्वाण प्राप्ति को सरल बनाने के लिए निम्न दस शीलों पर बल दिया।
अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (किसी प्रकार की संपत्ति न रखना), मध सेवन न करना, असमय भोजन न करना, सुखप्रद बिस्तर पर नहीं सोना, धन संचय न करना, स्त्रियों से दूर रहना, नृत्य गान आदि से दूर रहना। उनके अनुसार ग्रहस्थों के लिए प्रथम पांच शील तथा भिक्षुओं के लिए दसों शील मानना अनिवार्य बताया था। इस मौके पर काफी संख्या में उपासक मौजूद रहें।
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