गंध कुटी की परिक्रमा करते बौद्ध अनुयायी।
कटरा। बौद्ध सांस्कृतिक महासभा बुद्ध विहार में सोमवार से बौद्ध भिक्षुओं का त्रैमासिक वर्षावास अनुष्ठान शुरू हुआ। भिक्षु जलछनलामा ने बौद्ध धर्म में वर्षावास के विशेष महत्व पर प्रकाश डाला। इस दौरान अनुयायियों ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा लेकर विभिन्न स्थलों की परिक्रमा की। जलछनलामा ने बताया कि वर्षावास काल में भिक्षु विचरण नहीं करते हैं। वे भगवान बुद्ध के करुणा, शील और त्याग के सिद्धांतों का पालन करते हैं। अपना समय लोगों की भलाई, तपस्या और बौद्ध धर्म के अध्ययन में लगाते हैं। विचरण न करने के पीछे छोटे जीवों को पैरों से कुचलने से बचने की मान्यता है। बुद्ध ने कृषि को नुकसान से बचाने के लिए गांवों में भिक्षाटन न करने की सलाह दी। यह अनुष्ठान आषाढ़ पूर्णिमा से आश्विन पूर्णिमा तक चलता है। वर्षावास समाप्त होने पर बौद्ध मंदिरों में एक माह तक चीवरदान समारोह चलेगा।