आनंदबोधि पर प्रार्थना करते अनुयायी।
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को बौद्ध अनुयायियों से गुलजार रही। थाईलैंड व श्रीलंका से आए बौद्ध अनुयायियों ने जेतवन परिसर व महामंकोल बुद्ध विहार में अपने रीति रिवाज में प्रार्थना की।
बौद्ध भिक्षु दीपालोक ने कहा कि भिक्षुओं के लिए वर्षावास व फूल पूजा-पाठ का बड़ा महत्व है। यह ज्ञान, ध्यान और दान का स्थान है। बौद्ध भिक्षु अपने गुरु के सानिध्य में रहकर धर्म का अध्ययन करते हैं, ध्यान करते हैं और उपासकों को धम्म देशना देकर धर्म में अच्छी तरह से प्रतिष्ठित होते हैं। वर्षा विधि आहार और विहार के लिए भी उपयुक्त समय होता है। उन्होंने कहा कि इसका सही अर्थ जानकर समझदारी पूर्वक वर्षावास का लाभ उठाना चाहिए। शुरू में भिक्षु संघ ने त्रिशरण पंचशील दिया। इस दौरान बौद्ध भिक्षुओं ने तपोस्थली की परिक्रमा कर बुद्धम शरणम गच्छामि, संघम शरणम गच्छामि, धम्मम शरणम गच्छामि का उद्घोष भी किया। पूजन के बाद सभी उपासकों ने शिवली स्तूप, आनंद बोधि, कौशांबी कुटी, कच्ची कुटी पक्की कुटी, संघाराम, पूर्वाराम विहार, ओड़ाझार आदि का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की।