चीवर के साथ तपोस्थली का भ्रमण करते श्रीलंका से आए अनुयायी। -संवाद
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को श्रीलंका से आए बौद्ध अनुयायियों के 52 सदस्यीय दल से गुलजार रही। अनुयायियों ने चीवर पूजा की और चीवर लेकर तपोस्थली का भ्रमण किया। इसके बाद भिक्षु दीपालोक थेरो के नेतृत्व में आनंद बोधि पर चीवर चढ़ाकर प्रार्थना की।
बौद्ध सभा के दौरान भिक्षु दीपालोक थेरो ने कहा कि बुद्ध के विचारों से हमें जीवन में आगे बढ़ने और सफल होने की प्रेरणा मिलती है। यही कारण है कि भारत समेत दुनियाभर में बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं। बुद्ध के अनुशासन में कल्याण की भावना थी और डांट में करुणा थी।
उन्होंने आगे बताया कि बुद्ध ने मानव चेतना को सर्वोपरि माना। बौद्ध धर्म, धर्म के साथ एक व्यावहारिक रास्ता व आचार संहिता भी है। यह हमें बुराई से बचाते हुए अच्छे मार्ग पर चलना सिखाता है। बुद्ध के अनुशासन व विचारों का अनुसरण करना ही हमारा ध्येय होना चाहिए।