कौशाम कुटी में प्रार्थना करते अनुयायी।
कटरा। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती में बुधवार को म्यांमार के बौद्ध अनुयायियों का दल पहुंचा। बौद्ध भिक्षु देवानंद की अध्यक्षता में अनुयायियों ने कौशाम कुटी में पूजा-अर्चना की। इसके बाद आयोजित सभा में भिक्षु देवानंद ने गौतम बुद्ध के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सिद्धार्थ का जन्म 563 ईसा पूर्व लुंबिनी में हुआ था। 29 वर्ष की आयु में राजपाट त्यागकर उन्होंने सत्य की खोज शुरू की। 35 वर्ष की आयु में बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद वे बुद्ध कहलाए। उन्होंने चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग से दुख मुक्ति का संदेश दिया। इस दौरान भंते नागलोक, धम्म सागर, धम्म प्रिय, आनंद सागर और निर्मल सागर मौजूद रहे।