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तपोस्थली में समापन पूजन में जुटे बौद्ध अनुयायी

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बौद्ध सांस्कृतिक महासभा श्रावस्ती द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत ? - फोटो : SRAWASTI
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध सांस्कृतिक महासभा श्रावस्ती में मंगलवार को वर्षावास समापन पूजा का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता बौद्ध भिक्षु व धर्मगुरु डिकूंग रिपोनछे ने की। इस दौरान कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बर्मा के राजदूत मो कयूं यग मौजूद रहे।
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बौद्ध धर्मगुरु डिकुंग रिपोनछे ने कहा कि वर्षावास पूजा का बौद्धों में विशेष महत्व है। इस दौरान बौद्ध भिक्षुओं को यात्रा करना वर्जित है। भिक्षु चाहे विश्व के किसी भी कोने में रहे, उन्हें वहीं रहकर बुद्ध के करुणा, शील और त्याग के सिद्धांतों का पूर्णरूपेण पालन करना होता है। गौतम बुद्ध ने श्रावस्ती के जंगलों में 24 वर्षावास व्यतीत किया था।
बर्मा के राजदूत मो कयूं यग ने कहा कि वर्षावास पूजा श्रावस्ती में विलुप्त हो रही थी। इसका शुभारंभ बौद्ध सांस्कृतिक महासभा पूना की ओर से शुरू किया गया था। इसके तहत श्रीलंका, बर्मा, मलेशिया, तिब्बत, भूटान, थाईलैंड, भारत, अमेरिका आदि देशों के 100 बौद्ध भिक्षु श्रावस्ती में दो दिवसीय पूजन कर रहे हैं।
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प्रोफेसर बांगचुंग ने कहा कि वर्षावास पूजन के पीछे तर्क यह है कि वर्षाऋतु में कई तरह के छोटे छोटे जीव जन्म लेते हैं। जो विचरण करने से पैर से दब सकते हैं। इससे जीव की हत्या होती है। इससे बचने के लिए तीन माह एक जगह व्यतीत किया जाता है। भिक्षु खेबोरनडोल ने कहाकि वर्षावास का प्रारंभ भगवान बुद्ध ने किया था।
बुद्ध ने कहा था कि वर्षाकाल में गांवों में भिक्षाटन के लिए नहीं जाएं। भिक्षुओं के समूह में चलने से कृषि को काफी नुकसान हो सकता है। साथ ही कीड़े मकोड़ों का भी डर रहता है। इस दौरान त्रिपुरा के कलाकारों ने संगीत के माध्यम से बुद्धम शरणम गच्छामि का उद्घोष किया। वहीं लद्दाख से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। 16 जुलाई आषाढ़ पूर्णिमा से प्रारंभ होकर यह विशेष वर्षावास पूजा 14 अक्तूबर तक तपोस्थली में आयोजित की गई। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु जक्शन लामा, अशोक बौद्ध, भिक्षु देवेंद्र बौद्ध, भिक्षु गुणरत्न महाथेरो आदि लोग मौजूद रहे।
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