कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में विशेष वर्षावास पूजा के लिए गुरुवार को श्रीलंकाई दल तपोस्थली पहुंचाया। इसमें शामिल सदस्यों ने गंध कुटि पर माता सुमेदा महाथेरो के नेतृत्व में विशेष पूजा की। दल के सदस्यों ने तपोस्थली के विभिन्न मूमेंटों का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की।
विशेष वर्षावास पूजा के दौरान माता सुमेदा महाथेरो ने कहा कि बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती विश्व के ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल हैं। यहां स्थित गंधकुटि भगवान बुद्ध का प्रिय स्थान होने के कारण बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था का केंद्र है। यहां देश विदेश के बौद्ध अनुयायी विशेष पूजा अर्चना करने आते हैं।
भगवान बुद्ध के श्रावस्ती आगमन पर सेठ सुदत्त (अनाथ पिंडक) की ओर से निर्मित कराए गए जेतवन बौद्ध विहार में स्थित गंध कुटी महत्वपूर्ण स्थल है। यह चंदन की लकड़ी का बना सात मंजिला विहार था। इसका भगवान बुद्ध आवास के रूप में भी प्रयोग करते थे। यहीं भगवान बुद्ध अपने शिष्यों को प्रवचन तथा उपदेश देते थे।
चंदन निर्मित होने के कारण इस स्थान से आने वाली विशेष खुशबू के कारण ही इसे गंधकुटी नाम दिया गया। सातवीं शताब्दी में भारत भ्रमण पर आए चीनी यात्री फह्यान ने भी अपने यात्रा वृतांत में इसका उल्लेख करते हुए इसे दो मंजिला स्थान बताया था। ह्वेनसांग को यहां ईट निर्मित भवन के भग्नावशेष मात्र ही दृष्टिगत हुए।
उपेक्षा का शिकार होते-होते यह स्थान खंडहर में तब्दील हो गया। इसे मौर्यकाल, गुप्त काल और कुषाण काल में समय समय पर फिर निर्मित कराया गया। आज भी गंध कुटी के सामने स्थित सात खंडों का स्तूप इस स्थान के सात मंजिला होने को प्रमाणित करता है।
भगवान बुद्ध से जुड़ा होने के कारण यह स्थान विश्व भर के बौद्ध अनुयायियों के लिए सर्वाधिक पूजनीय है। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु दीपा लोक महाथेरो, आनंद सागर, धर्म सागर, माता विद्यावती, नाग सागर आदि बौद्ध भिक्षु तथा उपासक मौजूद रहें।