बोधि वृक्ष की पूजा करते महाराष्ट्र के अनुयायी।
- फोटो : बोधि वृक्ष की पूजा करते महाराष्ट्र के अनुयायी।
कटरा। महाराष्ट्र के अनुयायियों का 60 सदस्यीय दल बृहस्पतिवार को दर्शन-पूजन के लिए बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। सभी अनुयायियों ने भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से बोधि वृक्ष का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु ने कहा कि गौतम बुद्ध का जन्म 623 ईसा पूर्व दक्षिणी नेपाल के लुंबिनी प्रांत में हुआ था। उनके पिता शाक्य वंश के मुखिया शुद्धोधन और माता कोलिय राजकुमारी माया थीं। दरबारी ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि वह एक महान ऋषि या बुद्ध बनेंगे। जिसके बाद उनके पिता ने उन्हें बाहरी दुनिया के कष्टों से दूर रखा और उन्होंने 29 वर्षों तक विलासितापूर्ण जीवन जिया। कपिलवस्तु की गलियों में घूमने के दौरान उन्होंने वृद्ध, बीमार व्यक्ति और एक शव देख विचलित हो गए। उनके सारथी ने उन्हें समझाया कि सभी प्राणी वृद्धावस्था, रोग और मृत्यु के अधीन हैं। बुद्ध ने लौटते समय एक तपस्वी को देखा, जिसके बाद उन्हें आभास हुआ कि तपस्वी बनकर ही इन सभी दुखों पर विजय पाई जा सकती है और उन्होंने घर छोड़ दिया।