जेतवन परिसर में बृहस्पतिवार को प्रार्थना करते बौद्ध अनुयायी। - संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को श्रीलंका व वियतनाम से आए अनुयायियों के 65 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से बोधि वृक्ष का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि बुद्ध ने समाज को आध्यात्मिक ज्ञान, गहन ध्यान और आत्म अनुशासन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अनुभव, ज्ञान, विवेक, प्रज्ञा और करुणा को मुख्य बताया और इसे लोगों को मुक्ति की ओर ले जाने में सक्षम बताया।
भगवान बुद्ध ने अर्जित ज्ञान और विवेक का उपयोग अज्ञानता को दूर करने व सचाई का मार्ग दिखाने के लिए किया। बुद्ध ने धर्म और आध्यात्मिकता के गहन अध्ययन से अलौकिक क्षमताओं को प्राप्त किया। करुणा और प्रेम के बल पर बुद्ध ने अनगिनत रूपों में प्रकट होकर सभी प्राणियों को मुक्ति के तरीके सिखाए।
इसके बाद अनुयायियों ने गंध कुटी, शिवली स्तूप, राहुल कुटी, सूर्यकुंड, सभा मंडप, कच्ची कुटी-पक्की कुटी , संघमित्रा कुटी, संघाराम बुद्ध विहार, जेतवन परिसर का भ्रमण कर इतिहास की जानकारी ली।