तपोस्थली में रविवार को प्रार्थना करते अनुयायी। - संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों के 40 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में गंध कुटी पारंपरिक तरीके से दर्शन-पूजन व परिक्रमा की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि एक बार भगवान बुद्ध अपने अनुयायियों के साथ किसी गांव में उपदेश देने जा रहे थे। उस दौरान अनुयायियों ने देखा कि रास्ते में जगह-जगह गड्ढे खुदे पड़े हैं। अनुयायियों ने भगवान बुद्ध से जगह-जगह गड्ढे खुदे होने के संबंध में सवाल किया।
इस पर भगवान बुद्ध ने बताया कि पानी की तलाश में किसी व्यक्ति ने इतने गड्ढे खोद डाले हैं, लेकिन उस व्यक्ति में धैर्य नहीं था। उन्होंने समझाया कि मनुष्य को मेहनत के साथ-साथ धैर्य भी रखना चाहिए। धैर्य के बिना मेहनत निरर्थक साबित होती है।
बौद्ध सभा के बाद सभी अनुयायियों ने शिवली स्तूप, कौशांबी कुटी, संघारंभ बुद्ध विहार, संघमित्रा कुटी, राहुल कुटी, सूर्यकुंड, कच्ची कुटी-पक्की कुटी आदि का भ्रमण कर उनके इतिहास की जानकारी ली।