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वियतनाम से आया 50 सदस्यीय दल, वर्षावास पूजा की

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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली मंगलवार को अनुयायियों से गुलजार रही। वियतनाम से आए 50 सदस्यीय दल ने गंध कुटि पर विशेष वर्षावाष पूजा किया गया। इस दौरान अनुयायियों ने तपोस्थली के विभिन्न मूमेंटों में जाकर विश्व शांति की कामना की।
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विशेष पूजन के दौरान भिक्षु देवानंद ने कहाकि सभी जीवन की पवित्रता बनाए रखना और तथ्य ज्ञान में पूर्णता प्राप्त करना है। निर्वाण प्राप्त करना और तृष्णा का त्याग करना है। इसके साथ ही भगवान बुद्ध ने सभी संस्कार को अनित्य बताया है। भगवान बुद्ध ने मानव के कर्म को नैतिक संस्थान का आधार बताया है। अर्थात भगवान बुद्ध के अनुसार धम्म यानी धर्म वही है, जो सबके लिए ज्ञान के द्वार खोल दे। केवल विद्वान होना ही पर्याप्त नहीं है, विद्वान वही है जो अपने ज्ञान की रोशनी से सबको रोशन करे।
धर्म को लोगों की जिंदगी से जोड़ते हुए भगवान बुद्ध ने बताया कि करुणा शील और मैत्री अनिवार्य है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने कहा था कि लोगों का मूल्यांकन जन्म के आधार पर नहीं कर्म के आधार पर होना चाहिए। भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर दुनिया भर के करोड़ों लोग चलते हैं। इस दौरान अनुयायियों किए गए उद्घोष के कारण समूची तपोस्थली बुद्धम शरणम गच्छामि, संघम शरणम गच्छामि, धम्मम शरणम गच्छामि के उद्घोष से गूंजायमान रही।
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