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खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर बह रही राप्ती

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श्रावस्ती। राप्ती नदी का जलस्तर भले ही घट रहा हो लेकिन राप्ती बैराज पर नदी अब भी खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर है। घटे जलस्तर के कारण बाढ़ से घिरे कछार के गांवों में पानी धीरे धीरे घटने से राहत जरूर मिली है लेकिन कटान का खतरा बना हुआ है। कई गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग सहित नदी किनारे स्थित खेत कट कर फसल सहित नदी की धारा में विलीन हो रहे हैं। जिसे देख कछारवासियों का कलेजा मुंह को आ रहा है। फिलहाल अभी तहसील प्रशासन की ओर से न तो क्षति का आंकलन शुरू कराया गया है। और न ही कटान से होने वाले नुकसान का ही।
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पहाड़ों इलाकों में बीते 24 घंटे से बरसात न होने के कारण राप्ती नदी का जलस्तर धीरे धीरे घट रहा है। विगत 24 घंटे में नदी का जलस्तर 127.80 मीटर से पांच सेंटीमीटर घट कर शनिवार दोपहर दो बजे 127.75 मीटर मापा गया। घटे जलस्तर के कारण बाढ़ से जलमग्र हुए कछार के कई गांव में पानी धीरे धीरे घट रहा है। जिससे ग्रामीणों को राहत मिल रही है। वहीं इसके विपरीत घटते जलस्तर के साथ ही नदी की लहरों ने कटान भी तेज कर दी है। घटते जलस्तर के कारण भंगहा मल्हीपुर मार्ग स्थित मधवापुर घाट पुल के बन्दरवा बाबा कुट्टी के पास नदी खेतों में कटान कर रही है। जहां कई बीघा खेत फसल सहित कट कर राप्ती नदी की भेंट चढ़ रहे हैं। वहीं जमुनहा तहसील क्षेत्र के लौकिहा व सर्रा जाने वाले मार्ग पर भी कटान हो रही है।
इसके बावजूद नदी की कटान से बचाने के लिए प्रशासन की ओर से अब तक कोई पहल नहीं की गई है। इसके साथ ही राप्ती के कछार में बसे अशरफ नगर, चहलवा, सधईपुरवा, उत्तमापुर, सुल्तानाजोत, नरैनापुरख्, जिगरिया, ओरीपुरवाख्, बरंगा, भग्गनपुरवा, महराज नगर, वीरपुर, हरिहरपुर, पिपरहवा, बरुहा, मिसिरपुरवा व गुरुदत्तपुरवा सहित कई अन्य गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। यहां ग्रामीणों को हुए क्षति का आंकलन करने का कार्य भी अब तक शुरू नहीं हुआ है। जिससे कछार वासियों में तहसील प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। डीएम टीके शिबु ने बताया कि बाढ़ व कटान से होने वाले नुकसान का आंकलन कराया जा रहा है। साथ ही बाढ़ पीड़ितों को हर संभव मदद भी प्रशासन के स्तर से पहुंचायी जा रही है।
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