मरम्मत के बाद भी ज्यादातर गांवों में खराब पड़े हैंडपंप
संवाद न्यूज एजेंसी
तुलसीपुर (श्रावस्ती)। गांवों में हैंडपंप मरम्मत के नाम पर कागजी कोरम पूरा किया जा रहा है। इससे गांवों में लगे ज्यादातर हैंडपंप खराब हैं। जिसका खामियाजा गर्मियों में ग्रामीणों को भुगतना होगा। इसकी शिकायत के बाद भी अधिकारियों की खामोशी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।
ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो चुका है। बसंत पंचमी के साथ ही मौसम का पारा लगातार धीरे-धीरे बढ़ रहा है। ऐसे में हलक गीला करने के लिए ग्रामीणों को पानी का सहारा लेना पड़ता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में खराब पड़े ज्यादातर हैंडपंप लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। इतना ही नहीं हैंडपंप रीबोर के नाम पर मरम्मत न करके हैंडपंपों में लगी पाइप घटाई जा रही है। ऐसे में जहां कम गहराई का हैंडपंप होने के कारण उसका पानी दूषित हो रहा है। वहीं रीबोर के कुछ दिनों बाद दोबारा हैंडपंप खराब हो जाने से लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
ऐसा ही कुछ जमुनहा के रानीसीर व उसके चार मजरों में देखने को मिला। गांव के मजरा ढियुठी में शहजाद के घर के सामने लगा हैंडपंप खराब है। जबकि छह माह पूर्व इसे रीबोर कराया गया। इसके बावजूद हैंडपंप से पानी नहीं आ रहा है।
पास में ही गांव निवासी पंकज कुमार के घर के सामने लगा हैंडपंप एक वर्ष से खराब हैं। जबकि बेगमपुर में धीरज के घर के सामने, बुधराम व दुर्गा मंदिर के सामने लगा हैंडपंप भी एक वर्ष से खराब है। कागजों में इसकी कुछ माह पूर्व ही मरम्मत कराई गई थी। इस बारे में डीपीआरओ नंदलाल का कहना है कि गांव में खराब हैंडपंपों की मरम्मत का निर्देश दिया जा चुका है। यदि कहीं लापरवाही हो रही है तो सचिव पर कार्रवाई होगी।