श्रावस्ती। सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर सोमवार को सभी अधिकारी व कर्मचारी को बैज लगाया गया। इस दौरान डीएम कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में इसके महत्व पर भी चर्चा हुई। जिसमें शहीदों के सम्मान में आम लोगों को भी बैज लगाने व लोगों से खुले मन से आर्थिक सहयोग करने की डीएम ने अपील की।
सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर शनिवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान सैनिक एवं पुनर्वास कल्याण अधिकारी कर्नल सूर्यकांत मिश्रा ने जिलाधिकारी टीके शिबु को बैज लगाया। इस दौरान डीएम ने कहा कि सशस्त्र सेना झंडा दिवस देश की सेना के प्रति सम्मान प्रकट करने के दिन के रूप में मनाया जाता है। यह उन जांबाज सैनिकों के प्रति एकजुटता दिखाने का दिन है जो देश की तरफ आंख उठाकर देखने वालों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। सशस्त्र झंडा दिवस देश की सुरक्षा में शहीद हुए सैनिकों के परिवार के लोगों के कल्याण के लिए मनाया जाता है। इस दिन झंडे की खरीद से इकट्ठा हुए धन को शहीद सैनिकों के आश्रितों के कल्याण में खर्च किया जाता है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि खुले मन से आर्थिक सहयोग करें।
आजादी के बाद सरकार को लगा कि सैनिकों के परिवार वालों की जरूरतों का ख्याल रखने की आवश्यकता है। इसलिए 7 दिसंबर 1949 को झंडा दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया गया। शुरुआत में इस दिन को झंडा दिवस के रूप में मनाया गया। लेकिन 1993 में इस दिन को सशस्त्र सेना झंडा दिवस का नाम दिया गया। सशस्त्र झंडा दिवस द्वारा जमा हुई राशि युद्ध वीरांगनाओं, सैनिकों की विधवाओं, दिव्यांग सैनिक और उनके परिवार वालों के कल्याण पर खर्च की जाती है। इस मौके पर उन्होंने आम लोगों से भी अपील किया कि झंडा दिवस के अवसर पर बैज जरूर लगाए। यह एक प्रकार की राष्ट्र सेवा ही है। इस मौके पर जिलाधिकारी ने सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों, शहीदों की वीर नारियों, तथा उनके बच्चों को सशस्त्र झंडा दिवस की बधाई दिया है तथा उनके सुखद भविष्य की कामना किया। इस दौरान अपर जिलाधिकारी योगानंद पांडे, उप जिलाधिकारी आरपी चौधरी, सैनिक पुनर्वास कल्याण विभाग की लिपिक सुमन मिश्रा सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।