श्रावस्ती। तराई में मंगलवार रात हुई बूंदा बांदी के बाद से निकली चटक धूप ने धान किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। तराई में रूठे मेघों के कारण धान की रोपाई का काम बाधित हो गया है। इतना ही नहीं जिन किसानों ने पूर्व में धान की रोपाई कर दी थी, उन खेतों में रोपित धान के सूखने का खतरा मंडराने लगा है।
असिंचित तराई क्षेत्र में सावन लगने के बाद भी बदरा नहीं बरस रहे हैं। बीते कुछ दिनों हुई बरसात के बाद लगातार निकल रही तेज धूप के कारण खेतों की नमी भी तेजी से कम होने लगी है। ऐसे में बरसात को देख कर जिन किसानों ने धान की नर्सरी डाल दी थी उनके सामने नर्सरी बचाने का संकट उत्पन्न हो गया है। वहीं कई किसान नर्सरी तैयार होने के बावजूद बरसात न होने से धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं।
इस दौरान सिर्फ साधन संपन्न किसान ही पंपिंग सेट के सहारे खेतों में पानी भर कर धान की रोपाई कर पा रहे हैं। महंगे डीजल के कारण खेती की बढ़ती लागत के साथ ही पैदावार के भी प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि जिला कृषि अधिकारी डा. अवधेश कुमार यादव का कहना है कि अभी बरसात न होने से कोई विशेष नुकसान नहीं है। लेकिन अगर इस सप्ताह के अंत तक अच्छी बरसात नहीं होती है तो धान की पैदावार पर संकट पैदा हो सकता है।