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अनाथपिंडक ने रोपा था बोधिवृक्ष : देवानंद

Fri, 03 Apr 2026 11:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
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कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को वियतनाम से आए अनुयायियों के 60 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक ढंग से आनंद बोधिवृक्ष का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि यह वृक्ष जेतवन विहार के ठीक सामने स्थित है, इसे भगवान बुद्ध के समय का माना जाता है। यह आनंद बोधिवृक्ष बुद्ध के स्थायी चिह्न के रूप में स्थापित किया गया था। पजिवलिय नामक सिंहली ग्रंथ में इसका उल्लेख मिलता है।
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उन्होंने आगे बताया कि महात्मा बुद्ध केवल वर्षा ऋतु में जेतवन महाविहार में ठहरते थे, शेष समय वह भ्रमण करके उपदेश देते थे। अनुयायियों ने उनसे अपनी अनुपस्थिति में उपासना के लिए एक स्थायी चिह्न देने की प्रार्थना की थी। उसे स्वीकार कर बुद्ध ने अपने प्रधान शिष्य आनंद को बोधिवृक्ष की शाखा श्रावस्ती में लगाने की आज्ञा दी।
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देव शक्ति से संपन्न महामोगलायन वायु मार्ग से यह शाखा लाए थे। राजा प्रसेनजित ने रोपण से इंकार कर दिया था, जिसके बाद अनाथपिंडक ने इसे रोपा। महात्मा बुद्ध ने इस वृक्ष के नीचे पूरी एक रात ध्यानावस्था में व्यतीत कर इसकी महत्ता बढ़ाई थी। तब से लेकर आज तक अनुयायी इसे बुद्ध का रूप मानकर पूजते हैं। यह वृक्ष बुद्ध का प्रतीक है।
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