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नेपाल की खुली सीमा से आ रहे नेपाली नागरिक, चेतावनी जारी

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श्रावस्ती। नेपाल से भारत में प्रवेश के लिए सभी सीमा क्षेत्रों में प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन श्रावस्ती की खुली सीमा पर इस प्रतिबंध का कोई असर नहीं हो रहा है। अब लोग बहराइच के रुपईडीहा बार्डर के बजाय बघौड़ा क्षेत्र होते हुए जिले में आ रहे हैं। आने वालों में अधिकांश लोगों की रिश्तेदारियां जिले में हैं। यहां से यह लोग प्रदेश के अन्य हिस्सों में जा रहे हैं। गुपचुप तरीके से लोगों के आने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए चेतावनी भी जारी की है।
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नेपाल से भारत में आने के लिए सीमावर्ती क्षेत्र के सभी रास्तों को बंद कर दिया गया है। अब केवल नेपाल से यूपी में प्रवेश करने वाले केवल सोनौली बार्डर से ही आ सकेंगे। इस बार्डर पर थर्मल चेकिंग सहित आपातकाल से निपटने की व्यवस्था है। इस प्रतिबंध के बाद बहराइच के रुपईडीहा बार्डर को भी बंद कर दिया गया है।
बार्डर बंद होते ही नेपाल के वह नागरिक, जिनका व्यवसाय व अन्य कारणों से भारत में प्रतिदिन आना-जाना रहता है या फिर जिनकी रिश्तेदारी हैं। वह रुपईडीहा के बजाय श्रावस्ती के बघौड़ा सहित सोनपथरी सहित खुली सीमा से जिले में आ रहे हैं।
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आने वालोें में अधिकांश वह लोग हैं, जिनकी रिश्तेदारियां श्रावस्ती व बहराइच के साथ ही उत्तर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में हैं। यह ग्रामीण इलाकों से सीमा में प्रवेश करते हैं। इसके बाद बघौड़ा से चलने वाली निजी बसों व रिश्तेदारों की मदद से अन्य साधनों में सवार होकर भिनगा व लखनऊ की ओर रवाना होते हैं।
नेपाल का श्रावस्ती से सटा हुआ लगभग 72 किलोमीटर क्षेत्र है। इस क्षेत्र के दोनों ओर गांव बसे हैं। भारतीय क्षेत्र बघौड़ा के बाद नेपाल का बनिया गांव, सुइया होते हुए भगवानपुर फिर नेपाल की ओर जाने के लिए चौड़ा मार्ग है। रुपईडीहा बार्डर बंद होने के बाद नेपाल के लोग जिन्हें भारत में आना है। वह इन रास्तों का प्रयोग करते हुए सीधे श्रावस्ती में प्रवेश कर जाते हैं। यहीं से वह अन्य हिस्सों में रवाना हो रहे हैं।
सीमा क्षेत्र पर साप्ताहिक बाजार लगता है। इसमें बघोड़ा के पास गुरुवार व सोनबरसा में सोमवार को बड़ी बाजार लगती है। जिसमें हजारों की संख्या में नेपाली नागरिक सामान खरीदने आते हैं। आने वाले लोग वायरस से संक्रमित हैं अथवा नहीं। यहां इसकी जांच की कोई व्यवस्था नहीं है।
जबकि इस बाजार में जितने लोग नेपाल से आते हैं, उतने ही भारतीय गांव से आते हैं। यदि एक व्यक्ति भी संक्रमित हुआ तो इस बाजार से हजारों लोगों को नुकसान पहुंच सकता है। इस बाजार को अभी तक बंद करने के लिए प्रशासन की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
कोरोना वायरस से निपटने के लिए भले ही पूरा देश सतर्क हो, लेकिन जिले में इसकी कोई भी व्यवस्था नहीं है। यहां संदिग्धों के बलगम का नमूना लेकर बहराइच या फिर लखनऊ भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होती है। जबकि संयुक्त जिला चिकित्सालय में बनाए गए विशेष वार्ड में भी कोई खास व्यवस्था नहीं है।
यहां एक हाल में कुछ बेड डाले गए हैं। बेडों को कवर्ड करने के लिए ताकि संक्रमित वायरस फैले न उसकी भी व्यवस्था नहीं है। संदिग्धों की जांच के लिए चिकित्सकों व अन्य स्टाफ के लिए कोई अलग से कपड़े की व्यवस्था नहीं है। उन्हें केवल मास्क लगा कर संदिग्ध की जांच करनी होती है।
सीएमओ डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि नेपाल से जिले में आने वालों की जानकारी मिली है। मैंने व लखनऊ से आई विशेष टीम ने सीमा क्षेत्र का दौरा भी किया है। एसएसबी को अपनी इस चिंता से भी अवगत कराया गया है कि वह अनाधिकृत रूप से किसी को आने न दें।
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