श्रावस्ती। जिले में आए दिन सर्पदंश से हो रही मौत को देखते हुए प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। रविवार को डीएम ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को सर्पदंश की घटनाओं से बचने के लिए एहतियात बरतने की अपील की है।
विगत दिनों भिनगा कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी दंपती की सर्पदंश से मौत हो गई थी। जबकि इसी थाना क्षेत्र में तीन दिन पूर्व एक किशोर की मौत हुई है। इससे पूर्व भी कई लोगों की सर्पदंश से हुई मौत को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से लोगों को इससे बचाव के उपाय सुझाए गए हैं। डीएम कृतिका शर्मा ने बताया कि सांप के डसने के तुरंत बाद उस स्थान को साबुन व पानी से धो लें। दांत के निशान की जांच करें, दो दंत का निशान तो नहीं है। काटे हुए अंग को हृदय के लेवल से नीचे रखें। सर्पदंश वाले अंग को स्थिर करें, घाव के ऊपर बैंडेड लगाएं और घायल को सांत्वना दे।
घबराहट से हृदय गति तेज चलने से रक्त संचरण तेज होगा। इससे जहर शरीर में जल्द फैलेगा। मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाकर एंटी वेनम लगवाएं। साथ ही उन्होंने बताया कि सर्पदंश में बर्फ अथवा अन्य गर्म पदार्थ का इस्तेमाल काटे गये स्थान पर न करें, सर्प से प्रभावित व्यक्ति के कटे स्थान पर टूर्नीकेट न बांधें। इससे संबंधित अंग में रक्त प्रवाह पूरी तरह रुक सकता है। जिससे संबंधित अंग की क्षति हो सकती है।
बताया कि काटे गए स्थान पर चीरा न लगाएं। घायल को चलने से रोकें, शराब व नींद आने की कोई दवा न दें। मुंह से कटे स्थान को न चूसें, मंत्र या तांत्रिक के झांसे में कदापि न आएं। भय व चिंता न करें सभी सांप जहरीले नहीं होते है। जहरीले सांपों के पास हर समय पूरा जहर नहीं होता अगर पूरा जहर हो तो भी वह उसका लीथल डोज हमेशा नहीं प्रवेश कर पाते हैं।
जहरीले सर्प के काटने पर रुधि तंत्र पर असर करने वाले जहर, काटे गए जगह पर दर्द, नींद आना, सांस लेने में परेशानी, बंद होती पलकें इसके लक्षण हैं। साथ ही पक्षाघात, मुंह से झाग का आना, निगलने में परेशानी होती है। यदि कहीं सांप दिखे तो उसके बिल में कार्बोलिक एसिड डाल दें, उसके गंध से सांप भाग जाते हैं।