कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में विशेष वर्षावास पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इसी के क्रम में रविवार को यंग बोधिसत्व सोसायटी की ओर से आनंद बोधि पर विशेष पूजा की गई।
पूजन के दौरान यंग बोधिसत्व सोसाइटी इंडिया के अध्यक्ष बौद्ध भिक्षु देवेंद्र थेरों ने कहा कि जेतवन विहार के ठीक सामने आनंद बोधित के दर्शन होते हैं। कहा जाता है कि यह आनंद बोधि वृक्ष भगवान बुद्ध के समय का है। इसका पजिवलिय नामक सिहली ग्रंथ में उल्लेख मिलता है। जेतवन महाविहार की तमाम ऐसे उल्लेख भी मिले हैं जिसमे कहा गया है कि महात्मा बुद्ध यहां केवल वर्षा ऋतु में ही ठहरते थे। शेष समय वह भ्रमण करके उपदेश देते थे। इससे उनके अनुयायियों को उनके संपर्क में अधिक से अधिक रहने का सौभाग्य प्राप्त होता था।
उस समय सभी ने महात्मा बुद्ध से प्रार्थना की कि वह अपना कोई स्थायी चिह्न उनके लिए दें, जिसकी उपासना उनकी अनुपस्थिति में भी की जा सके। इसे स्वीकार कर बुद्ध ने अपने प्रधान शिष्य आनंद को बोधि वृक्ष की शाखा श्रावस्ती में लगाने की आज्ञा दी। जिनकी अनुमति पर देव शक्ति से संपन्न महामोगलायन वायु मार्ग से जाकर इस वृक्ष की शाखा लाए। सबकी इच्छा थी कि राजा प्रसेनजित ही उस शाखा का रोपण करें, परंतु उन्होंने यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि राजा की शक्ति की स्थिरता निश्चित नहीं।
अत: किसी ऐसे व्यक्ति से उसका रोपण होना चाहिए जो चिरकाल तक उसकी रक्षा कर सके। तब यह कार्य अनाथपिंडक द्वारा किया गया। महात्मा बुद्ध ने इसके नीचे पूरी एक रात्रि ध्यानावस्था में व्यतीत कर इस वृक्ष की महत्ता एवं पवित्रता को और बढ़ा दिया था। तब से लेकर आज तक अनुयायी इसे बुद्ध का रूप मानकर पूजते हैं। इस दौरान बौद्ध भिक्षु अशोक कुमार बौद्ध सहित काफी संख्या में अनुयायी मौजूद रहे। संवाद