श्रावस्ती/गिलौला/इकौना। तराई में यूरिया की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है, नौबत हाथापाई तक पहुंच चुकी है। निजी दुकानदार यूरिया की कमी का पूरा फायदा उठा रहे हैं, कमी का हवाला देकर 300 से 400 रुपये प्रति बोरी की दर से बेच रहे हैं, जबकि सरकारी कीमत लगभग 267 रुपये है। कई दुकानदार किसानों को जबरन यूरिया के साथ सप्लीमेंट दे रहे हैं। यही कारण है कि सहकारी समितियों से किसानों की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है।
यूरिया की एक बोरी के लिए बुधवार सुबह बहुद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति गिलौला पर किसानों की भारी भीड़ उमड़ी। किसान धक्कामुक्की करते दिखे, जिसके चलते समिति पर पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस की मौजूदगी में सचिव ने किसानों को यूरिया वितरित की।
सचिव नंद कुमार ने बताया की 400 बोरी यूरिया समिति पर उपलब्ध है, 116 बोरी यूरिया और आ रही है। किसानों को खतौनी के आधार पर पांच बीघा पर एक बोरी यूरिया दी जा रही है।
यही आलम बहुद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति इकौना पर भी देखने को मिला। यहां भी किसानों की लंबी-लंबी कतार लगी रही। यहां भी शांतिपूर्ण ढंग से खाद के वितरण के लिए पुलिस तैनात रही।
सिरसिया के चिल्हरिया मोड़ स्थित गोदाम पर खाद के लिए किसानों का हुजूम उमड़ा। यहां सुबह से ही लंबी-लंबी लाइन देखने को मिली। सैकड़ों किसानों को घंटों लाइन लगाने के बाद भी बिना खाद लिए मायूस लौटना पड़ा।
निजी विक्रेता सुधरें, तो खत्म हो मारामारी
समितियों पर एक बोरी खाद के लिए जद्दोजहद कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि निजी विक्रेता 30 से लेकर 100 रुपये तक महंगी खाद दे रहे हैं। साथ ही जबरन खाद के लिए विभिन्न कंपनियों के जिंक, पोटाश व नैनो यूरिया समेत अन्य सप्लीमेंट दे रहे हैं, जिसके चलते गरीब किसान समितियों का रुख कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि अगर प्रशासन निजी विक्रेताओं के यहां मौजूद खाद को भी सरकारी रेट पर किसानों को उपलब्ध करवा दे, तो यूरिया संकट खत्म हो जाए।
किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं
इस बार समय से धान की रोपाई होने व समय के साथ बारिश होने से यूरिया की मांग बढ़ी है। वर्तमान में 2718 मीट्रिक टन यूरिया व 2173 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। 630 मीट्रिक टन एनपीके व 3638 मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
-अनिल मिश्रा, जिला कृषि अधिकारी